साहित्य संगम समिति के तत्वावधान में रक्षाबंधन पर्व
पर रविवार को खंनगा बाजार चौराहे पर काव्य गोष्ठी हुई। इसमें कवियों ने
कजली मेले और देश भक्ति पर कविताएं प्रस्तुत कीं। हरिश्चंद्र वर्मा ने
कविता पढ़ी, लोकतंत्र में सिर्फ कमजोर ही हलाल हुआ है, नेता जी अमीर हो गए
ये कमाल हुआ है।
गोष्ठी में विदेश विद्यासन ने कीरत सागर के कजली
मेले के संदर्भ में कविता के माध्यम से कहा कि राखी न राखी लाज, तो बहना मर
जाए रे, अरे बेंदुला के चढ़वैया जो तुम न आए रे।
मनोज ने पढ़ा, हे
प्याज देवी तुमको नमन, तेरी जगह अनार की सलाद खा लूंगा। संतोष वर्मा ने
कहा कि जागो देश प्रेमियों हाथ में मशाल लो, नारियों का देश में सम्मान
होना चाहिए।
लखनलाल चौरसिया ने पढ़ा, जिंदगी अनमोल है न व्यर्थ खोया
कीजिए, हो सके तो आदमी के काम आया कीजिये। हरदयाल हरि ने कहा कि तुम न
माने अगर मन की करते रहे, क्रोध की आग में विश्व जल जाएगा।
रामप्रकाश
पुरवार ने पढ़ा कि प्रेम अनुराग है, करुणा है, हृदय की सरलता, जीवन शक्ति
है। डा. एसली अनुरागी ने रचना पढ़ी कि गोरखगिरि मेला जइयो रे, सिद्ध के
दर्शन करियो रे, गोष्ठी में देवराज वर्मा, हरीशंकर नायक, अमृतलाल, अब्दुल
रऊफ ने भी रचना पढ़ी।