चैत्र नवरात्र के पहले दिन शुक्रवार को देवी मंदिर भक्तों से गुलजार रहे। पूजा के लिए सुबह से ही श्रद्घालु मंदिर पहुंचने लगे थे। यह सिलसिला देर रात तक जारी रहा। पूजा के साथ ही सुख समृद्धि की कामना की गई। मंदिरों में जयकारे गूंजते रहे।
शुक्रवार को 51 शक्तिपीठों में शुमार ऐतिहासिक मां बड़ी चंद्रिका मंदिर, छोटी चंद्रिका मंदिर, बड़ी कालीमाता मंदिर, शारदा मंदिर, चकौटा देवी मंदिर, विंध्यवासिनी मंदिर, गायत्री मंदिर, शीतला माता मंदिर, सिंह भवानी सहित शहर व देहात के मंदिरों में श्रद्घालुओं ने विधि विधान से पूजा की। बड़ी चंद्रिका मंदिर में लगे मेले में महिलाओं ने खरीददारी की। बच्चे झूला झूलते रहे।
बड़ी चंद्रिका मंदिर में पंकज द्विवेदी, राहुल दीक्षित, कौशल, रीतेश, गौरव, मनीष आदि ने व्यवस्थाएं देखीं। यहां सुबह साढ़े पांच बजे हुई आरती में खासी भीड़ रही। मंदिर के पुजारी चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय ने बताया कि मां दुर्गा अपने पहले स्वरूप में शैलपुत्री के नाम से जानी जाती हैं। पर्वतराज हिमालय के यहां पुत्री के रूप में उत्पन्न होने से इनका नाम शैलपुत्री पड़ा। अपने पूर्व जन्म में यह प्रजापति दक्ष की कन्या के रूप में उत्पन्न हुई थंी। तब इनका नाम सती था । इनका विवाह भगवान शिव से हुआ ।