सूखा राहत मुआवजे के नाम पर किसानों के साथ मजाक किया जा रहा है। विकासखंड कबरई के ग्राम बबेड़ी में एक किसान के खाते में 100 रुपये मुआवजा राशि भेजी गई है। इससे किसान मायूस है। उसका कहना है कि लेखपाल व बैंक के चक्कर काटने में ही 500 रुपये बर्बाद हो चुके हैं। उसके बाद जो मुआवजा मिला उससे परिवार को एक दिन का खाना नहीं दिया जा सकता है।
ग्राम बबेड़ी निवासी कालका प्रसाद पुत्र परमा के पास तीन बीघा भूमि है। उसने खेत में गेहूं बोया था। सूखे के चलते फसल खेत में ही सूख गई। जिससे एक दाना भी पैदावार नहीं हुई। सरकार की ओर से सूखा राहत का मुआवजा देने के लिए करोड़ों का बजट आया था। उसे पानी के लिए किसान लेखपालों के यहां चक्कर लगाने लगे। किसान के अनुसार जिसने सुविधा शुल्क दिया। उसे बेहतर मुआवजा मिला। जिन किसानों ने सुविधा शुल्क का विरोध किया उनके खातों में धनराशि नहीं पहुंची।
किसान कालका प्रसाद सूखा राहत के मुआवजे के लिए लेखपाल व अधिकारियों के कार्यालय के चक्कर काटता रहा। दो दिन पहले मुआवजे की धनराशि उसके खाते में आने की जानकारी हुई। आर्थिक तंगी से जूझ रहा किसान जब सूखा राहत की आई धनराशि निकालने बैंक पहुंचा और पासबुक में इंट्री कराई तो और मायूस हुआ। राजस्व विभाग ने किसान के खाते में सूखा राहत की धनराशि के रूप में महज 100 रुपये भेजे हैं। ऐसे दर्जनों किसान है, जिनके साथ मुआवजे के नाम पर मजाक किया गया है।