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शिकायतों का निस्तारण न होने से फरियादियों का हो रहा मोहभंग

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चरखारी (महोबा)। जिला स्तरीय संपूर्ण समाधान दिवस में फरियादी शिकायतों के निस्तारण के लिए महीनों से चक्कर लगा रहे हैं। हर बार शिकायत दर्ज कराने के बाद भी निस्तारण न होने से फरियादियों का अब मोहभंग हो रहा है। यही वजह है कि मंगलवार को चरखारी तहसील में आयोजित समाधान दिवस में फरियादियों का टोटा रहा। महज 41 लोगों ने शिकायतें दर्ज कराईं, जिनमें से 13 का मौके पर निस्तारण किया गया।
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जिलाधिकारी अवधेश कुमार तिवारी की अध्यक्षता में चरखारी तहसील सभागार में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में सुबह से ही फरियादियों की भीड़ कम नजर आईं। कम संख्या में पहुंचे परियादियों ने अपनी शिकायतें दर्ज कराईं। समाधान दिवस में सबसे ज्यादा शिकायतें प्रधानमंत्री आवास से संबंधित रहीं। जिसमें डीएम डूडा विभाग के अधिकारियों को एक सप्ताह के अंदर शिकायतों के निस्तारण के निर्देश दिए। किसान सम्मान निधि योजना की 13 शिकायतों का मौके पर निस्तारण किया गया। लेखपाल ने बताया कि सम्मान राशि किसानों के खाते में भेज दी गई है। इस मौके पर पुलिस अधीक्षक मणिलाल पाटीदार, सीडीओ हीरा सिंह, सीएमओ डॉ. सुमन, एसडीएम राजेश कुमार, सीओ दिनेश कुमार आदि अधिकारी मौजूद रहे।
12 माह में की 12 शिकायतें, नहीं मिली एक भी योजना
कोतवाली चरखारी के ग्राम सूपा निवासी सुशीला देवी पत्नी भरतलाल मंगलवार को एक बार फिर समाधान दिवस में शिकायत दर्ज कराने पहुंची। उसने बताया कि दो वर्ष पहले उसके पति की दुर्घटना में मौत हो गई थी। उसकी एक पुत्री है। मकान कच्चा है लेकिन अभी तक उसे आवास, पेंशन व अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिला। एक वर्ष से वह बराबर समाधान दिवस में शिकायत कर रही है लेकिन निस्तारण नहीं हुआ।
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शिकायत करके थक चुकी प्रेमा, नहीं मिला लाभ
कस्बा चरखारी के मोहल्ला अमरगंज निवासी प्रेमादेवी पत्नी नंदकिशोर समाधान दिवस में शिकायत दर्ज कराने पहुंची। उसने बताया कि एक वर्ष पहले उसका प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुआ था लेकिन आज तक उसके खाते में एक भी किस्त नहीं आई। विभाग व कर्मचारियों से बात करने पर सुविधा शुल्क की मांग की जाती है। आवास के लिए वह छह बार समाधान दिवस व अधिकारियों से शिकायत कर थक चुकी है लेकिन कोई लाभ नहीं मिला।
तीन बार शिकायत के बाद भी नहीं मिला मुआवजा
कोतवाली चरखारी के ग्राम इमलीखेड़ा निवासी दिनेश पुत्र मदन ने समाधान दिवस में शिकायत दर्ज कराने के बाद बताया कि उसके खेतों के बगल से नहर निकली थी। अर्जुन सहायक परियोजना के तहत नहर को बंद कर दिया गया, जिससे उसके खेतों में पानी भर जाने से खरीफ फसल बर्बाद हो गई। तीन बार समाधान दिवस व अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन न तो कोई कार्रवाई हुई और न ही बर्बाद फसल का मुआवजा दिलाया गया।
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