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विदेशी पक्षियों का डेरा तैयार, दूरबीन से होगी निगहबानी

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दूरबीन से परिंदों की निगेहबानी करते अशोक कुमार सिंह - फोटो : MAHOBA
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महोबा। विजय सागर पक्षी विहार में सर्दी में आने वाले विदेशी पक्षियों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग के अधिकारियों ने तैयारी कर ली है। अबकी जहां दूरबीन से परदेसी परिंदों की निगहबानी की जाएगी, वहीं सुरक्षा के लिहाज से वन विभाग के कर्मचारी असलहों से लैस होकर नाव से तालाब में गश्त करेंगे।
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विजय सागर पक्षी विहार बुंदेलखंड का प्रमुख पर्यटन स्थल है। यहां देसी पक्षी भी बड़ी संख्या में रहते हैं, वहीं ठंड के मौसम में परदेसी परिंदे यहां की खूबसूरती को बढ़ा देते हैं। यहां प्रतिवर्ष हजारों किलोमीटर का सफर तय करके विदेशी पक्षी आते हैं। हालांकि, इन मेहमान पक्षियों पर शिकारियों की नजर रहती है। पक्षियों को शिकार होने से बचाने के लिए विभागीय अधिकारी पूरी तरह तैयार हैं।
इसके लिए बाकायदा कर्मचारियों की टीम लगाई गई है। सुबह की पाली में सुबह चार बजे से 11 बजे तक और दूसरी पाली में शाम छह से आठ बजे तक कर्मचारी मुस्तैद रहेंगे। विजय सागर पक्षी विहार के वन दरोगा अशोक कुमार सिंह ने बताया कि परदेसी पक्षियों की सुरक्षा को लेकर उनके पास दो दूरबीन और तीन राइफल हैं। साथ ही तालाब में गश्त करने के लिए एक नाव भी मंगाई गई है।
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ये विदेशी पक्षी हैं आते---
पक्षी विहार में लालसर, सैंकपर, हंसमटामर समेत कई प्रजातियों के पक्षी ठंड पड़ने के साथ आने लगते हैं। कुछ पक्षी आने भी लगे हैं। ठंड का मौसम खत्म होने के बाद वापस लौट जाते हैं।
देसी प्रजाति के मौजूद पक्षी---
पनकौआ-124
टिटेरे-60
जलमुर्गी-40
पक्षी विहार के बारे में ये भी जाने---
-विजय सागर झील का निर्माण चंदेल राजा विजय वर्मन ने 1040 ई. में कराया था।
-उत्तर भारत एवं सुदूर यूरोपीय देशों से आने वाले विदेशी पक्षियों ने इसे अपना शीतकालीन बसेरा बनाया है।
-उत्तर प्रदेश सरकार ने इस झील के प्रवासी व स्थानीय पक्षियों, वन्यजीवों, वनस्पतियों व जैव विविधता तो संरक्षण देने के लिए इस क्षेत्र के 262 हेक्टेयर को 26 जून 1990 को विजय सागर पक्षी विहार घोषित किया था।
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-उत्तर प्रदेश के कुल 23 वन्यजीवों पक्षी विहारों में बुंदेलखंड का ये पक्षी विहार भी एक है।
-वन जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 18 के तहत ये क्षेत्र पक्षी विहार घोषित है।
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