महोबा। सराफा कारोबारी को पीटकर 22 लाख रुपये लूटे जाने के करीब 14 साल पुराने मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर प्रथम/विशेष न्यायाधीश ध्रुव राय ने फैसला सुनाया। दोष सिद्ध होने पर पांच आरोपियों को सात-सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई। साथ ही 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। मामले में बर्खास्त सिपाही ने साथियों संग मिलकर लूट की घटना को अंजाम दिया था। हालांकि न्यायालय में मामला चलने के दौरान बर्खास्त सिपाही अब्दुल रसीद की मौत हो गई थी।
जनपद बांदा के कैलाशपुरी कॉलोनी निवासी संजय अग्रवाल ने कोतवाली कुलपहाड़ में तहरीर देकर दी थी। बताया था कि 11 दिसंबर 2012 को वह साथी भूदीप उर्फ रानू कुमार व विनय मिश्रा निवासी बांदा के साथ ट्रेन से 35 किलो चांदी लेकर झांसी होते हुए शाम करीब छह बजे आगरा पहुंचे। वहां रामभाई निवासी चौबे फाटक को चांदी दी और 22 लाख रुपये लिए। 12 दिसंबर की रात तीनों लोग वहां से महाकौशल एक्सप्रेस से निकले। रेलवे स्टेशन मऊरानीपुर में तीन लोग बोगी में सवार हुए जो पुलिस की वर्दी में थे। इसमें एक युवक खुद को एसआई, दूसरा सिपाही व तीसरा फॉलोअर बता रहा था। एसआई का चेहरा खुला था और शेष दोनों लोग अपना चेहरा मफलर से बांधे थे।
खुद को एसआई बताने वाले युवक ने एक कंप्यूटराइज्ड पेपर दिखाया जिसमें उसका नाम व पता लिखा था। साथ ही फोटो भी लगी थी। इन लोगों ने कहा कि उसके नाम का वारंट है। इसके बाद तीनों ने उसे मध्यप्रदेश के हरपालपुर स्टेशन पर उतार लिया और मारपीट की। स्टेशन के बाहर लाकर मारुति वैन में बैठाया और पनवाड़ी होते हुए कुलपहाड़ की ओर लाने लगे। रास्ते में सुगिरा गांव के पास आरोपियों ने वैन रोकी और मारपीट करते हुए 22 लाख रुपये की नकदी से भरा बैग व तीनोंं के मोबाइल छीनकर भाग गए। कुलपहाड़ कोतवाली पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना शुरू की। घटना में बर्खास्त सिपाही अब्दुल रसीद निवासी सिकंदरपुरा जनपद हमीरपुर, मुन्ना निवासी पड़री जनपद बांदा, उवैद उर्फ बौरा निवासी गोयरा मुगली जनपद बांदा, विनय कुमार निवासी स्वराज कॉलोनी बांदा, मुनीर खां और मरिया उर्फ बब्बू के नाम सामने आए। पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में पेश किए। न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते पांच आरोपियों को सजा सुनाई।