कुलपहाड़ (महोबा)। कस्बा कुलपहाड़ के मोहल्ला कठबरिया में तीन बच्चों की हत्या व मां के फांसी पर लटकते मिलने की घटना ने सभी को झकझोर दिया। रविवार की सुबह छह बजे ही अंतिम संस्कार के लिए एक साथ घर से चार अर्थियां निकलीं। इस दौरान मायके पक्ष के लोगों ने पहले कार्रवाई और बाद में अंतिम संस्कार किए जाने की मांग की। चार घंटे तक पुलिस व परिजनों के बीच बातचीत का दौर चलने के बाद करीब दस बजे अंतिम संस्कार हो सका। बवाल की आशंका को देखते हुए भारी पुलिस फोर्स तैनात रहा।
मोहल्ला कठबरिया निवासी कल्याण सिंह की पत्नी सोनम, पुत्र विशाल, पुत्री आरती व अंजलि के शव बंद कमरे में मिले थे। शनिवार की रात पोस्टमार्टम के बाद करीब नौ बजे शव परिजनों को सौंपे गए। रात हो जाने के चलते शवों का अंतिम संस्कार नहीं हो सका। सुबह छह बजे ही चारों शवों के अंतिम संस्कार की तैयारी की गई। समाज के बुजुर्गों ने बच्चों के शव दफनाने का सुझाव रखा। इस दौरान मायके पक्ष के लोगों ने घटना के दोषियों के खिलाफ पहले कार्रवाई किए जाने और बाद में अंतिम संस्कार किए जाने की मांग शुरू कर दी। चार घंटे तक परिजनों के अपनी मांग पर अड़े रहने से अंतिम संस्कार नहीं हो सका। बाद में कोतवाल उमेश कुमार ने तहरीर के आधार पर कार्रवाई किए जाने का भरोसा देकर अपनी मौजूदगी में अंतिम संस्कार कराया। तीनों बच्चों को दफनाया गया जबकि महिला का अंतिम संस्कार पति कल्याण सिंह ने पुलिस अभिरक्षा में किया। एक साथ चार अर्थियां निकलने से लोगों के आंसू छलक पड़े। गांव में मातम छाया रहा। महिलाएं मृतका के घर के दरवाजे पर परिजनों को ढांढ़स बंधाती रही।
घटना से आधे मोहल्ले में नहीं जले चूल्हे
एक साथ तीन बच्चों व मां की मौत होने की घटना से शनिवार की रात आधे मोहल्ले के घरों के चूल्हे नहीं जले। देर रात पोस्टमार्टम के बाद शव घर आने के चलते परिजनों में रोना-पीटना मचा रहा। जिससे मोहल्ले की महिलाएं भी गमगीन माहौल में बैठी रहीं।
पूरे दिन चला पंचायतों का दौर
तीन बच्चों व मां की मौत के मामले में पूरे दिन परिजनों के बीच पंचायतों का दौर चला। मायके पक्ष के लोग मृतका की शेष बची एक बची पुत्री के नाम भूमि कराने की मांग करते रहे। हालांकि मृतका के बड़े भाई भान सिंह ने बताया कि वह तहरीर देने थाने गए थे। कोतवाली प्रभारी के न मिलने पर वह वापस लौट आए। सोमवार को तहरीर देंगे। उधर कोतवाल उमेश कुमार का कहना है कि मृतका के भाई का फोन आया था। तहरीर देने की बात कही गई। उस समय वह महोबा में थे। उन्होंने थाने में तहरीर देने के लिए कहा था।