- शहर में मौजूद 42 छोटे-बड़े नालों की सफाई में हुई खानापूर्ति
फोटो 30 एमएएचपी 12 परिचय-शहर के शुक्रवारी बाजार के पास झमाझम बारिश से जलमग्न सड़क। संवाद
फोटो 30 एमएएचपी 13 परिचय-नाले उफनाने से दुकानों में घुस रहा बारिश का पानी। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
महोबा। मानसून की पहली ही बारिश ने शहर में नाला सफाई की पोल खोल दी। निकासी न होने से नाले उफना गए। इससे सड़कें जलमग्न हो गईं। ऐसे में लोगों को आवागमन में न सिर्फ दिक्कत हुई बल्कि दुकानों में पानी घुसने से दुकानदार परेशान रहे।
मौसम विभाग की ओर से दो दिन पहले बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया था। सोमवार की रात करीब 11 बजे अचानक मौसम का मिजाज बदल गया। आसमान में बादल छाने के साथ ही बिजली की गड़गड़ाहट हुई और बारिश शुरू हो गई। झमाझम बारिश का दौर करीब दो घंटे तक रुक-रुककर चलता रहा। इसके बाद बूंदाबांदी होने लगी। बारिश के कारण लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली, लेकिन मानसून की पहली ही बारिश ने नाला सफाई की पोल खोलकर रख दी।
शहर में छोटे-बड़े नालों की संख्या 42 है। मानसून सत्र शुरू होने के पहले ही शहर में नाला सफाई कराने के लिए उच्चाधिकारियों की ओर से पालिका प्रशासन को निर्देश दिए गए थे, लेकिन पालिका के जिम्मेदारों ने नाला सफाई के नाम पर जमकर लापरवाही बरती गई। अधिकांश नालों की सफाई नहीं हो सकी। इससे बारिश के दौरान अधिकांश नाले उफना गए। शहर के रोडवेज बस स्टैंड, पुराने इंडियन बैंक, शुक्रवार बाजार के पास, परमानंद चौराहा समेत कई स्थानों पर सड़कों में जलभराव हो गया। कई स्थानों पर पानी लोगों के घरों व दुकानों में प्रवेश कर गया। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
दो घंटे बिजली कटौती से परेशान रहे लोग
महोबा। बारिश के दौरान बीती रात करीब 11 बजे बिजली आपूर्ति ठप हो गई। इससे लोगों के कूलर-पंखे ठप हो गए और अंधेरा पसर गया। करीब दो घंटे तक बिजली आपूर्ति ठप रही। इसके बाद रात एक बजे आपूर्ति बहाल हुई। तब लोगों ने राहत की सांस ली लेकिन थोड़ी ही देर बाद फिर से आपूर्ति ठप हो गई। इसके बाद बिजली के आने-जाने का सिलसिला चलता रहा। इससे लोग परेशान रहे।
बरसी राहत, खेती को मिली संजीवनी
महोबा। बारिश की उम्मीद लगाए बैठे किसानों के लिए सोमवार की रात आसमान से राहत बरसी। बारिश ने खरीफ फसल की खेती के लिए संजीवनी का काम किया। माह जून में होने वाली बारिश खरीफ फसलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। लौकी, करेला, तोरई, भिंडी व ग्वार फली जैसी हरी सब्जियों के साथ-साथ अरहर, मक्का और बाजरा जैसी फसलों के लिए यह बारिश जरूरी है। कृषि विज्ञान केंद्र बेलाताल के वैज्ञानिक रजनीश मिश्रा का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में भी अच्छी बारिश होती रही तो खरीफ सीजन बेहतर रहेगा और सिंचाई पर होने वाला खर्च भी कम होगा।
फोटो 30 एमएएचपी 12 परिचय-शहर के शुक्रवारी बाजार के पास झमाझम बारिश से जलमग्न सड़क। संवाद