महोबा। पशु-पक्षियों के प्रति सभी को लगाव होता है लेकिन शहर के निवासी पंकज दीक्षित पशुओं को जीवन देने का काम कर रहे हैं। दिन हो या रात किसी भी समय घायल पशु की सूचना पर वह युवाओं की टीम के साथ मौके पर पहुंचते हैं और उसका इलाज कर खान-पान की व्यवस्था कराते हैं। दवाओं से लेकर मरहमपट्टी का काम वे स्वयं करते हैं और खर्च भी स्वयं उठाते हैं। उनकी पशु सेवा का यह कारवां अब हमीरपुर, बांदा व चित्रकूट तक पहुंच गया है।
एमबीबीएस की कोचिंग चलाने वाले डॉ. पंकज दीक्षित ने वर्ष 2001 से पशु सेवा का संकल्प लिया। शुरुआती तीन वर्षों में उन्होंने चिड़ियों को पानी पिलाने के लिए जगह-जगह बर्तन रखवाए। साथ ही पेड़ों पर लकड़ी के घोसले बनवाकर टांगे। पक्षियों की सेवा के साथ उन्होंने बेजुबान पशुओं की सेवा शुरू की। अब लोग घायल पशुओं को पशु अस्पताल ले जाने के बजाय उन्हें फोन पर सूचना देते हैं।
डॉ. पंकज बताते हैं कि शुरुआती दौर में वह पशु चिकित्सक के साथ जाते थे। इसके बाद उन्होंने पशुओं के इलाज के लिए पशु चिकित्सालय से प्रशिक्षण लिया और अन्य युवाओं को प्रेरित किया। इस समय उनकी टीम गांव-गांव में सक्रिय है। सूचना मिलते ही उनकी टीम पशुओं का पूरा उपचार करती है और पूरी तरह से स्वस्थ न होने पर देखरेख से लेकर खानपान तक की व्यवस्था करती है। उनका कहना है कि पशु-पक्षियों की सेवा से बड़ा कोई काम नहीं है। पशु-पक्षियों से ही मानव जीवन संचालित होता है।
निशुल्क प्राणी सेवा केंद्र का हो रहा संचालन
महोबा। शहर के स्टेशन मार्ग में पंकज दीक्षित के साथी डॉ. राजेश राजपूत ने प्राणी सेवा केंद्र स्थापित किया है। जहां बीमार व घायल पशुओं का निशुल्क इलाज व मरहमपट्टी की जा रही है। प्रतिदिन केंद्र में पांच से छह आवारा पशुओं को इलाज के लिए लेकर लोग पहुंचते हैं।
टीम में यह लोग हैं शामिल
महोबा। टीम में डॉ. पंकज दीक्षित के साथ डॉ. राजेश राजपूत, शिवकुमार, आशीष तिवारी, राजेश, इमरान, आशाराम, शोएब समेत दो दर्जन से अधिक लोग शामिल हैं। महोबा के अलावा हमीरपुर, बांदा व चित्रकूट में भी निशुल्क प्राणी सेवा के लिए युवाओं की टीम काम कर रही है।