कुलपहाड़ (महोबा)। कस्बा कुलपहाड़ में चल रहे जलविहार मेला महोत्सव में सांस्कृतिक मंच पर कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। इस दौरान कवियों ने एक से बढ़कर एक रचनाएं पेश कर समां बांध दिया। राजधानी लखनऊ से आए कवि प्रख्यात मिश्रा ने देशभक्ति पर एक पत्नी की कविता देश के तिरंगे तेरा रंग धुंधला पड़े न, इसलिए अपना सुहाग दे रही हूं मैं, सुनाकर माहौल देशभक्तिमय कर दिया।
कवयित्री वंदना श्रीवास्तव दिल्ली ने आंगन का शृंगार है बेटी खुशियों का अंबार है बेटी, जीने का अधिकार न छीनो जीवन का आधार है बेटी... पेश की। सूरज पंडित लवकुशनगर ने धर्म सनातन पर जब प्रश्न खड़े होने लगते, उत्तर में श्री संत प्रेमानंद यहां मिल जाएंगे... प्रस्तुत की। रीतेश पटैरिया श्रीनगर ने हम तुम में कुछ चमन छछुंदर बैठे हैं, सेक्युलर फाइबर के कीड़े जिनके अंदर बैठे हैं... पेश की। कामता माखन रीवा ने खुला खाते गर गरीब की रोटी को, है हिम्मत तो थप्पड़ मारो गद्दारों को.... प्रस्तुत की।
अभिराम पाठक छतरपुर ने सूरज जब आता है भारत में शीश उठाकर आता है, पर शौर्य देखकर भारत का वह शीश झुकाकर जाता है... पेश की। अंचल शर्मा जालौन ने कभी घबराए चंचल मन हमें तुम याद कर लेना, कभी तन्हा लगे जीवन हमें तुम याद कर लेना... प्रस्तुत कर दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। कवि मधुप श्रीवास्तव नर कंकाल की कविता हम ई-रिक्शा चलाएं सवारी बैठाएं, आप सरकार चलाएं विधायक बैठाएं.. पसंद की गई। कार्यक्रम का संचालन नितेंद्र चौबे कुलपहाड़ ने किया।