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देवोत्थान एकादशी पर वृंदावनी नजारा

Thu, 10 Nov 2016 10:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, महोबा
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गोवर्धन्नाथ जू मंदिर की परिक्रमा लगाती महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
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कार्तिक मास धरम का महीना, भीड़ पड़त इतै भारी, वृंदावन भई चरखारी, पक्तियां देवोत्थान एकादशी पर गुरुवार को चरितार्थ नजर आई। गोवर्धन्नाथ मंदिर में दूर दराज से आए हजारों भक्तों ने मंदिर की परिक्रमा कर पूजा अर्चना की। लोगों ने मेले का मजा भी लिया और खूब खरीददारी की।कस्बा चरखारी
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में 108 कृष्ण मंदिरों और कमलदल से आच्छादित सप्त सरोवरों की नैसर्गिक सुंदरता देखते ही बनती है। इससे चरखारी को बुंदेलखंड का कश्मीर कहा जाता है। यहां दीपावली के दूसरे दिन से एक माह तक चलने वाले गोवर्धन्नाथ जू मेले में सबसे ज्यादा भीड़ देवोत्थान एकादशी से शुरू होती है। गुरुवार को

देवोत्थान एकादशी के मौके  पर चरखारी का नजारा वृंदावनी नजर आया। सुबह से कार्तिक स्नान करने वाली महिलाओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। दूर दराज के गांवों व पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश से आने वाली महिलाएं ट्रैक्टर, टेंपो व निजी वाहनों से गोवर्धन्नाथ जू मंदिर पहुंची। मेले में अधिक भीड़
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होने के चलते पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। जगह-जगह नगर पालिका प्रशासन ने बैरीकेडिंग करके व्यवस्था बनाए रखी। इस मौके पर उपजिलाधिकारी मृदुल चौधरी, क्षेत्राधिकारी नंदलाल, नगर पालिका चेयरमैन प्रतिनिधि मुईनुद्दीन, कोतवाली प्रभारी बलजीत सिंह सहित कई थानों की पुलिस व्यवस्था में मुस्तैद रही।

14 नवंबर को होगा जवाबी कीर्तन
सहस्त्र श्री गोवर्धन्नाथ जू महाराज मेला में 14 नवंबर को रात में कीर्तनकार हरीओम द्विवेदी रायबरेली और कानपुर की विद्या शर्मा के बीच जवाबी कीर्तन होगा। कार्यक्रम संयोजक चंद्रशेखर तिवारी और नरेंद्र पटैरिया ने बताया कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रधान संगठन जिलाध्यक्ष पुष्पा देवेंद्र सिंह और चरखारी प्रधान संघ ब्लाक अध्यक्ष कपित तिवारी होंगे।

10 से 50 रुपये में बिका एक गन्ना
 देवोत्थान एकादशी पर गन्ने का महत्व अधिक होने से एक गन्ना 10 से 50 रुपये में बिका। देर शाम तक गन्ना खरीदने के लिए बाजार में लोगों की भारी भीड़ ज़ुटी रही। किसानों व दुकानदारों ने महंगे दाम पर गन्ना बेचकर मुनाफा कमाया। देवोत्थान एकादशी पर नई फसल की पूजन सामग्री की भी खरीददारी

हुई। पूजा सामग्री में चने की भाजी, बेर, मूंग की कोसे, कचरिया, मकुंइया आदि शामिल रहा। महिलाओं ने गन्ने के साथ पूजा सामग्री खरीदी। शाम को घरों के बाहर दीपक जलाए गए। बच्चों ने पटाखा व फुलझड़ी जलाकर खुशियां मनाई।
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