= आल्हाखंड के महानायक ऊदल की बुंदेलों ने मनाई जयंती
फोटो 04 एमएएचपी 12 परिचय-शहर के मुख्य बाजार में वीर ऊदल की जयंती पर पुष्प अर्पित कर नमन करते बुंदेले। स्रोत : आयोजक
संवाद न्यूज एजेंसी
महोबा। अपनी वीरता से 11वीं-12वीं शताब्दी में चंदेल राजवंश की यश कीर्ति शिखर पर पहुंचाने वाले वीर ऊदल की जयंती कृष्ण जन्माष्टमी पर शुक्रवार को मनाई गई। बुंदेलों ने ऊदल चौक स्थित उनके स्मारक पहुंच श्रद्धा सुमन अर्पित किए और उनकी वीर गाथाओं का बखान किया। साथ ही प्रशासन से वीरभूमि महोबा में एक ऐसा संग्रहालय बनाने की मांग की, जिसमें वीर आल्हा-ऊदल से जुड़े सचित्र वर्णन एक साथ उपलब्ध हों।
बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने बताया कि वीर ऊदल का जन्म महोबा से 10 किमी दूर दिसरापुर गांव में चंदेल नरेश परमाल के सेनापति दक्षराज व माता देवला के आंगन में जन्माष्टमी को हुआ था। उनके भाई वीर आल्हा का जन्म ज्येष्ठ दशहरा को हुआ था, लेकिन दुर्भाग्यवश ऊदल जब गर्भ में थे, मांडवगढ़ के राजा करिया ने उनके पिता दक्षराज और चाचा वक्षराज की हत्या कर दी। बाद में राजा परमाल ने आल्हा ऊदल को पाला।
सबसे पहले आल्हा ऊदल ने शक्तिशाली मांडवगढ़ के राजा जम्बे व उनके बेटे करिया को धूल चटाई और पिता की मौत का बदला लिया। फिर दिल्ली नरेश पृथ्वीराज चौहान को हराया। उन्होंने 52 लड़ाइयां जीतकर चंदेल साम्राज्य को दूर-दूर तक फैलाया, लेकिन आज संरक्षण के अभाव में आल्हा ऊदल की सभी निशानियां धीरे-धीरे मिट रही हैं, जिन्हें संरक्षित किया जाए। इस दौरान महामंत्री डा. अजय बरसैंया, अवधेश, पवन गुप्ता, गयाप्रसाद, प्रेम चौरसिया, मनप्रीत सिंह, प्रमोद शुक्ला, महेंद्र, दीपू, रवि सोनी मौजूद रहे।