सूखे भूखे बुंदेलखंड में अब पशुओं की जान पर बन आई है। हालत यह है कि उन्हें अब न भूसा मिल रहा है और न चारा। पशु जीवन बचाने के लिए पॉलिथीन और अखबार व कागज खाकर पेट भर रहे हैं। नालियों का गंदा पानी पी रहे हैं।
जिले में सूखा पड़ जाने से इंसानों के साथ साथ पशुओं के सामने खानपान के लाले पड़ गए हैं। फसल की पैदावार न होने से जहां इंसानों के सामने अनाज का संकट पैदा हो गया है वहीं पशुओं को चारा भूसा ढूंढे नहीं मिल रहा है। पशुओं के लिए खानपान का इंतजाम न होता देख पशुपालकों ने जानवरों कोे छोड़ दिया है जिससे दूध देने वाले पशु चारे भूसे की तलाश में जंगलों की खाक छान रहे है। कहीं पर भी चारा भूसा न मिलने से कागज खाकर पेट भर रहे हैं।
बारिश न होने से जंगल और तालाबों के मैदान में उगने वाला चारा भी अब नहीं दिखाई दे रहा है। तमाम पशु अब मजबूरन पेट की भूख मिटाने के लिए पेड़ों की पत्तियों को अपना भोजन बना रहे है। कमोवेश यही हाल पानी का है। बांध और तालाबों के सूख जाने से पानी के लिए पशु मारे मारे घूम रहे है। पानी न मिलने से अकसर पशुओं की तालाबों के किनारे मौत हो जाती है। पशुपालक भी घर में भूसा चारा न होने के कारण पशुओं की चिंता नहीं कर रहे है।
भूसे के संकट से पशुपालकों ने पशुओं को बेचना शुरू कर दिया है। पशु बाजार में दुधारू पशुओं की खासी भीड़ जुट रही है। यहां तक कि लोग अब भैंसों को भी ओने पौने दामों में बेच रहे हैं। पशुपालक रामदेव, फूलसिंह यादव का कहना है कि चारा भूसा न मिलने से मजबूरी में उन्हें पशु बाजार में बेचा जा रहा है। पशुपालकों ने बताया कि ज्यादा पशु आने के कारण सस्ते दामों में पशु बिक रहे हैं।