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60 दिन में 12 किसानों ने लगाया मौत को गले

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होबा। बुंदेलखंड के अति पिछडे महोबा जिले में दैवीय आपदाओं के प्रकोप से कराह रहे बुंदेले किसान दाने दाने को मोहताज है। जून और जुलाई माह में 60 दिन के अंदर जिले में 12 किसान मौत को गले लगा चुुके है। प्रत्येक किसान की मौत के पीछे कर्ज मुख्य कारण सामने आया। खेती में सही उपज न होने से बैंक और साहूकारों का कर्ज ले चुके किसान उसकी अदायगी नहीं कर पा रहे है। बेटियों के हाथ पीले करने और परिवार के भरण पोषण की चिंता किसान को खाये जा रही है।
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जिले में बीते एक दशक से दैवीय आपदाओं का प्रकोप है। लगातार सूखा और फिर अतिवृष्टि व ओलावृष्टि ने किसानों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया। हालात यह है कि सैकड़ों एकड़ के कास्तकार मुश्किल से परिवार चला पा रहे है वही तमाम छोटे किसान परिवार सहित मेहनत मजदूरी के लिए महानगरों को पलायन कर चुके है। जो किसान खेती कर रहे है उनका खाद बीज का पैसा भी मुश्किल से निकल पा रहा है। ऐसे में किसान बैंक और साहूकारों से लिए गए कर्ज की अदायगी व बेटियों के हाथ पीले नहीं कर पा रहे है। पैसे का इंतजाम कही से होता न देख किसान आत्महत्या करने को मजबूर है।
8 जून 2018 को ग्राम जतौरा निवासी किसान भुज्जू (60) की हार्टअटैक से मौत हो गई। मृतक पर एक लाख रुपये साहूकारों का कर्ज था। 13 जून को कोतवाली कुलपहाड़ के ग्राम बुधौरा निवासी नौ एकड़ के काश्तकार खेत सिंह भी 2.70 लाख रुपये बैंक कर्ज की अदायगी की चिंता में सदमेे से मौत का शिकार बन गया। 27 जून को बघवा निवासी गंगादीन अहिरवार ने बैंक व साहूकारों के कर्ज से परेशान होकर फांसी लगा ली। दो जुलाई को ग्राम खन्ना निवासी तिजवा प्रजापित ने 74 हजार रुपये कर्ज की अदायगी न होने पर फांसी लगाकर जान दे दी। 11 जुलाई को ग्राम कुड़ार निवासी कृपाल राजपूत ने बैंक व साहूकारों के कर्ज से परेशान होने जहर खाकर मौत चुन ली। 16 जुलाई को ग्राम सुरहा निवासी बद्दू अनुरागी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। 18 जुलाई को ग्राम सलैया खालसा निवासी हरीराम व ग्राम नगाराडांग निवासी मोहनलाल ने फांसी लगाकर जान दे दी। 22 जुलाई को बम्हौरी निवासी अहिवरन सिंह ने कर्ज से परेशान होकर फांसी लगा ली। 24 जुलाई को ग्राम गहरा निवासी नत्थू पुत्र सत्तू ने बैंक कर्ज के चलते जहर खाकर जान दे दी। 28 जुलाई को बिलरही निवासी महिला किसान कुंअरबाई ने कर्ज और मर्ज से परेशान होकर जहर खाकर मौत चुन ली। 29 जुलाई को ग्राम खमा निवासी गोपीचंद्र ने कर्ज और बीमारी के चलते घर पर फांसी लगाकर जान दे दी थी। लगातार हो रही किसानों की मौत का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन शासन प्रशासन इनको रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रहा है।
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कर्जमाफी का किसानों पर नहीं दिखा असर
महोबा। सूबे में भाजपा की सरकार बनने के बाद छोटे किसानों के एक लाख रुपये तक के कर्ज माफ किए जाने का एलान हुआ। तमाम किसानों को इसका लाभ भी मिला और कुछ वंचित भी रह गए, लेकिन सरकार की कर्जमाफी का जिले में कोई असर नहीं दिखा। आधा अधूरा कर्ज माफ होने से किसानों का बोझ तो कम हुआ लेकिन उन्हें तत्कालिक राहत महसूस नहीं हुई।
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60 दिन में 12 किसानों ने लगाया मौत को गले
- कर्ज से परेशान बुंदेले किसान चुन रहे मौत
- खेती में सही उपज न होने से दाने दाने को मोहताज हुए किसान
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