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कोरोना काल में ठहरी जिंदगी, घबराए जरूर लेकिन हारे नहीं

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महोबा। कोरोना महामारी को फैले पूरा एक साल हो गया है। लॉकडाउन के बाद का संकटकालीन दौर लोगों की जेहन में आज भी बरकरार है। इस वायरस ने ऐसी दहशत फैलाई कि लोगों को न चाहते हुए भी अपनों से अलग होना पड़ा। जिंदगी ठहर सी गई।
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लोग घरों पर रहने को मजबूर हो गए। मजदूरों की मजदूरी छिन गई। वहीं, इस नाजुक घड़ी में कुछ ऐसे भी लोग थे, जो कोरोना काल से डरे नहीं बल्कि बीमारी से जंग जीतकर लौटे तो लोगों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया। लोगों को कोरोना से बचाव के लिए जागरूक किया। स्वास्थ्य महकमे के योद्धा जान की बाजी लगाकर संक्रमित मरीजों की देखभाल की। इन योद्धाओं की ही बदौलत हमने इस महामारी से डटकर मुकाबला किया और बड़ी संख्या में संक्रमित लोगों को नई जिंदगी मिली। अब फिर कोरोना ने पांव पसारना शुरू कर दिया है। ऐसे में एक बार फिर इन्हीं कोरोना योद्धाओं से नगर वासियों को आस है।
24 मार्च को जिले में लॉकडाउन के बाद प्रशासन की सख्ती से कर्फ्यू जैसा नजारा रहा, चहल पहल वाली सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। जिले के वाशिंदों ने ऐसे में कोविड नियमों का पालन कर प्रशासन का साथ दिया। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक घर की देहरी के बाहर नहीं निकले। इस दौरान साफ-सफाई व अन्य उपायों का प्रचार-प्रसार हुआ तो लोगों की जिंदगी में भी बदलाव आया। हाथ धोने से लेकर साफ-सफाई के तरीके बदल गए, जो लोगों की आदत में अब कहीं न कहीं शामिल हो गए हैं। लोगों की माने तो इस महामारी ने एकजुट होकर हर संकट की घड़ी का सामना करना सिखाया है। साथ ही यह भी कहते हैं कि हौसला नहीं हारना चाहिए। मुश्किलें एक दिन खुद ही लौट जाती हैं।
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कुलपहाड़ कस्बे के अधिवक्ता बृजेंद्र द्विवेदी मई महीने में कोरोना की चपेट में आग गए। वह बताते हैं कि उस समय ऐसा लगा कि अब जिंदगी खत्म हो गई। पर पत्नी व परिवार के लोगों ने उनका हौसला बढ़ाया। 14 दिन बाद वह पूरी तरह स्वस्थ होकर लौटे तो उन्होंने वकालत के साथ समाजसेवा के क्षेत्र में सहयोग किया। लोगों को कोरोना से बचाव के प्रति जागरूक किया। गरीबों को भोजन भी मुहैया कराया।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र श्रीनगर के फॉर्मासिस्ट सुनील कुमार चार महीने पहले कोरोना संक्रमित हुए। आठ दिन क्वारंटीन रहने के बाद वह दोबारा काम पर लौटे और दोगुनी ऊर्जा के साथ मरीजों का इलाज किया। वह बीमारी की चपेट में आने के बाद भी घबराए नहीं, बल्कि अस्पताल आने वाले मरीजों का इलाज के साथ बचाव के तरीके बताए। ताकि न सिर्फ संक्रमण को रोका जा सके बल्कि लोगों में जागरूकता आ सके।
सड़कें और गलियां सूनी हो गईं थीं
महोबा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर 22 मार्च 2020 को जनता कर्फ्यू का ऐसा असर दिखा कि हर वक्त भीड़भाड़ व शोरगुल में डूबी सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। कोरोना को हराने के लिए लोग घरों में कैद रहे तो सड़कों में कई किमी दूर तक एक शख्स नजर नहीं आया। चौराहों पर पुलिस फोर्स के अलावा कोई व्यक्ति नहीं निकला। शहर के रोडवेज से जाने वाले मुख्य मार्ग व मेन मार्केट में पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा। एक साल बाद आज वही बाजार व सड़कें फिर गुलजार हो गईं हैं, लेकिन 22 मार्च का वह दिन आज भी लोगों के जहन में ताजा है। शाम के समय ताली, थाली और आतिशबाजी के साथ घरों में दीपक जलाने से दिवालीमय नजारा दिखा था।
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