चकबंदी में अधिकारियों की मनमानी से नाराज किसानों ने शनिवार को बैठक कर विरोध जताया। इन्होंने चकबंदी में कुओं और पेड़ों की भी मालियत लगाए जाने की मांग की। किसानों ने चकबंदी कमेटी की अनदेखी करने का भी आरोप लगाया ।
बैठक में किसान नेता भारत सिंह ने कहा कि मौजा कुलपहाड़ में 1979 से चकबंदी चल रही है। चकबंदी के दौरान खेतों में बने कुओं और पेड़ों की मालियत नहीं लगाई गई। इससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। आबादी के नजदीक जमीन की कीमतें बढ़ चुकी हैं। आबादी क्षेत्र की मालियत भी उसी हिसाब से लगाई जानी चाहिए। ऐसा न होने से काश्तकारों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
चकबंदी कमेटी के अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह ने कहा कि एक किसान के आठ चक बन गए हैं। काश्तकारों के चक एक स्थान पर बनाए जाएं। इससे उन्हें चकबंदी का सही लाभ मिल सके। चकबंदी विभाग के अधिकारी नियमों के विपरीत कार्य कर रहे हैं। मेन रोड पर सहखातेदारों के समान चक बनाने के आदेश थे। उच्चाधिकारियों ने दो प्रतिशत कटौती के लिए कहा था। कर्मचारियों ने चार प्रतिशत कटौती काट ली। गूल की मालियत न लगाने से हजारों एकड़ भूमि असिंचित हो जाएगी।
यहां राधेलाल यादव, अशोक अग्रवाल, पंचम सिंह, जाहर सिंह, माहराज सिंह, रमेश ,मोहनलाल, भागीरथ सहित तमाम किसान मौजूद रहे।