महोबा। दूसरे लॉकडाउन के बाद महानगरों से घरों की तरफ पैदल और वाहनों से निकले 500 से ज्यादा श्रमिकों को यूपी-एमपी की बॉर्डर पर रोक लिया गया। भूखे-प्यासे श्रमिक का खानपान कोई इंतजाम न होने पर श्रमिकों ने जमकर हंगामा किया और हाईवे पर बैठ गए। दो घंटे तक दोनों तरफ वाहन फंसे रहे। शनिवार की रात को पहुंचे डीएम-एसपी ने श्रमिकों को समझा-बूझाकर कुछ को वाहनों और कुछ को पैदल निकाला। उधर कृषि विज्ञान केंद्र बेलाताल में 16 श्रमिक डेढ़ माह से फंसे हैं।
श्रीनगर प्रतिनिधि के अनुसार गुजरात, आंध्रप्रदेश और महाराष्ट्र से ट्रकों और पैदल चलकर बहराइच, बस्ती, बनारस और चित्रकूट जाने वाले 500 श्रमिकों को ट्रक चालकों व अन्य वाहनों ने मध्य प्रदेश के छतरपुर जनपद में उतार दिया। जहां से यूपी-एमपी की सीमा पर बने कैमाहा बॉर्डर में पुलिस ने श्रमिकों को रोक लिया। दो दिन से भूखे श्रमिकों को घर जाने से रोकने और खाने का कोई इंतजाम न करने से गुस्साएं श्रमिकों ने सरहद पर हाईवे जाम कर दिया। जिससे यूपी-एमपी का आवागमन ठप हो गया। रात में पहुंचे डीएम अवधेश तिवारी, एसपी मणिलाल पाटीदार ने श्रमिकों को समझाया लेकिन उन्होंने एक नहीं सुनी और अफसरों के सामने हंगामा करते रहे। मामला बिगड़ता देख प्रशासन ने फुटकर-फुटकर श्रमिकों को निकालकर पल्ला झाड़ा।
कबरई प्रतिनिधि के अनुसार लॉकडाउन के बाद मुंबई से पिकअप गाड़ियों व अन्य वाहनों से प्रतापगढ़, आजमगढ़ के लिए व पैदल जाते समय करीब 300 श्रमिकों को रविवार की सुबह पुलिस ने बांदा-महोबा बॉर्डर पर रोक लिया। सैकड़ों श्रमिकों को देख पुलिस के हाथ-पांव फूल गए। प्रशासनिक अधिकारियों ने श्रमिकों के खानपान का इंतजाम कराया। जिलाधिकारी के निर्देश पर बॉर्डर पर पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सभी श्रमिकों की जांच कराई। जांच के बाद श्रमिकों को अपने गृह जनपद प्रतापगढ़, आजमगढ़ के लिए रवाना किया। श्रमिक हरीओम, फूलचंद्र ने बताया कि वह बिस्किट, चिप्स के सहारे चार दिन से यात्रा कर रहे हैं। आज उन्हें भोजन नसीब हुुआ हैं।