महोबा/कुलपहाड़। लॉकडाउन में जो जहां था, वहीं ठहर गया। छात्र-छात्राएं भी फंस गए। इससे अभिभावकों की रातों की नींद हराम रही। शनिवार को प्रदेश सरकार द्वारा बसों को भेजकर कोटा राजस्थान से दो बसों से 29 छात्र-छात्राओं को महोबा भेजा गया। जिन्हें जनतंत्र इंटर कॉलेज कुलपहाड़ और कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय महोबा में बनाए गए क्वारंटीन केंद्र में ठहराया गया।
राजस्थान के कोटा में फंसे बच्चों के लिए अभिभावकों ने सांसदों से कोटा के जिलाधिकारी को पत्र भिजवाकर बच्चों को अपने-अपने गृहनगर भेजने की मांग की। सांसदों और विधायकों के पत्र पर कोटा के जिला प्रशासन ने छात्र-छात्राओं को बसों से झांसी, महोबा, चित्रकूट, हमीरपुर और बांदा के लिए रवाना किया। पहली बस में महोबा जिले के 17, बांदा-चित्रकूट जनपद के 17 और हमीरपुर के तीन छात्र-छात्राएं आए। दूसरी बस में महोबा के 12 और बांदा-चित्रकूट के 16 छात्र-छात्राएं आए। महोबा के छात्र-छात्राओं को क्वारंटीन करने के बाद अन्य जनपदों के छात्र-छात्राएं बसों से अपने जिले के लिए रवाना हो गए।
पनवाड़ी के प्रियांशु और चरखारी के आयुष का कहना है कि कोटा में सभी छात्र-छात्राएं अलग-अलग कमरे में रहते थे। जिससे संक्रमण का खतरा नहीं था। दिन में कई बार माता-पिता से मोबाइल फोन से माध्यम से बात होती थी और वीडियो कॉल भी करते थे। उनका कहना है कि शुक्रवार की शाम को 7.30 बजे कोचिंग सेंटर में बुला लिया था। जहां पर कोचिंग संचालकों ने खान-पान की व्यवस्था की थी। शनिवार को सुबह चार बजे कोटा से बसें रवाना हुई। 15 घंटे तक कहीं पर कोई खानापीना नहीं मिला। उप जिलाधिकारी कुलपहाड़ मोहम्मद उवैस और तहसीलदार सुबोधमणि ने बस के आने पर छात्र-छात्राओं को भोजन की भी व्यवस्था कराई।