महोबा। जिले में दो साल से बारिश न होने से चंदेल कालीन सरोवरों ने जवाब दे दिया है। जिससे पानी को लेकर हालात भयावह हो गए हैं। तालाबों, पोखरों के सूख जाने से जलस्तर नीचे खिसक गया है। वहीं कुओं और हैंडपंपों ने जवाब दे दिया है। तालाबों में भी थोड़ा बहुत पानी रह जाने से पेयजल आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
महोबा शहर में पानी की आपूर्ति चंदेल कालीन सरोवर मदन सागर से की जाती है। दो साल से बारिश न होने के कारण तालाब सूख जाने से शहर की पेयजल आपूर्ति बाधित हो रही है। जिससे लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। अन्य तालाबों में धूल उड़ने के कारण पानी के लिए पशु-पक्षी बेहाल हैं। इसी तरह कबरई बांध के सूख जाने से कबरई कस्बे में पानी को लेकर हायतौबा मचने लगी है। बावजूद इसके जल निगम पेयजल समस्या से निपटने के लिए कोई योजना नहीं बना रहा है।
बेलासागर से बेलाताल के अलावा कुलपहाड़, मुढ़ारी सहित कई गांव में पानी की आपूर्ति की जाती है लेकिन इस साल बेलासागर ने भी जवाब दे दिया है। जिससे पेयजल आपूर्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। पानी के लिए लोग हैंडपंपों और कुओं में पहुंच रहे हैं। हैंडपंपों में भी पानी कम निकलने से पानी की समस्या दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है।
जलस्तर घटने से ट्यूबवेल से नहीं आ रहा पानी
शहर के गांधीनगर व हाथी चौराहे के हाथी पूंछ के पीछे मोहल्ले में ट्यूबवेलों से पानी की आपूर्ति की जाती है। जलस्तर नीचे खिसक जाने के कारण ट्यूबवेलों ने भी जवाब दे दिया है। जिससे हाथी चौराहा के पास पिछले एक सप्ताह से पेयजल आपूर्ति ठप है। यहां के बाशिंदे रात को जागकर हैंडपंपों से पानी भर रहे हैं।
सूखे के चलते हैंडपंप बने शोपीस
सूखे के चलते जलस्तर नीचे खिसक जाने से दिनरात चलने वाले हैंडपंपों से भी पानी निकलना बंद हो गया है। वहीं तमाम हैैंडपंप सूखे पड़े हैं। जिससे पानी की समस्या बढ़ गई है। तमाम हैंडपंप शोपीस बनकर रह गए है। जल निगम द्वारा सूखे हैंडपंपों के स्थान पर रीबोर कराया जा रहा है लेकिन पानी न निकलने से रीबोर भी सफल नहीं हो रहे।