पंचायत चुनाव के बाद इस दफा प्रधान कई रिकार्ड तोड़कर छोटी संसद में पहुंचे। किसी ने पीढ़ियों से एक ही परिवार में चली आ रही प्रधानी छीनी तो कहीं टेंपो चालक ने प्रधान की कुर्सी प्राप्त की। इतना ही नहीं इस बार यूनिवर्सिटी से गोल्ड मेडलिस्ट और एमएससी, बीएड डिग्रीधारकों ने भी प्रधानी की राह चुनकर गांव के विकास को कर्मभूमि बनाया।
विकासखंड कबरई की श्रीनगर ग्राम पंचायत से पहली बार प्रधान बनी कल्पना दीक्षित एमए बीएड हैं। वहीं सिजहरी ग्राम पंचायत से चुनी गई वंदना ने बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से एमएससी में गोल्ड मेडल हासिल किया है। ग्राम पंचायत बरा निवासी भगवानदास बेहद गरीब हैं, वह दूसरे के यहां ट्रैक्टर चलाकर बच्चों का पालन पोषण करते है। धन की कमी के बाद भी उसने पंचायत चुनाव में हिस्सा लिया था।
गांव के लोगों ने उसकी गरीबी को देखकर उसे ग्राम प्रधान चुन लिया। विकासखंड चरखारी के ग्राम कुड़ार में पहली बार दयाराम गांव के प्रधान बने थे। इनके बाद तीन बार बेटा जयसिंह और दो बार कीर्तिरानी प्रधान चुनी गई। तीन दशक से परिवार में प्रधानी रही, लेकिन पहली बार ज्ञानप्रकाश ने कीर्तिरानी को हराकर दशकों पुरानी प्रधानी छीन ली। इसी तरह ग्राम पंचायत गौरहारी ने सबसे कम उम्र के युवक राजू राजपूत (25) प्रधान पद पर काबिज हुए है।
विकासखंड जैतपुर की ग्राम पंचायत मगरौलकला निवासी मनोज कुमारी चौथी बार लगातार प्रधान पद पर जीत दर्ज की है। ग्राम मगरिया निवासी हरगोविंद के पास एक बीघा भी जमीन नहीं है, लेकिन उसने टेंपो चलाकर रात में भी लोगों के बुरे वक्त में उनका साथ दिया। गांव के लोगों ने उसकी इस अदा को देखते हुए उसकी पत्नी रामबाई को प्रधान बना दिया।
ग्राम पंचायत अजनर से सरोज देवी ने जिले में सबसे ज्यादा 1528 मतों से रिकार्ड जीत दर्ज की। इनके परिवार में तीन बार ससुर और दो बार सास भी प्रधान रह चुकी हैं। ग्राम पंचायत गुढ़ा के हर्षवर्धन बीएससी है, जबकि अन्य प्रत्याशी कम पढ़े लिखे हैं, ग्रामीणों ने पढ़े लिखे प्रत्याशी पर भरोसा जताते हुए उसे छोटी संसद पहुंचा दिया।