जल संस्थान की लापरवाही से खरेला, रिवई और सुदामापुरी सामूहिक पेयजल योजनाएं गर्मी शुरू होते ही धड़ाम हो गई हैं। इससे ग्रामीण बूंद बूंद पानी के लिए मोहताज हैं।
चरखारी से खरेला के बीच जगह- जगह पाइप लाइनें टूटी हैं। इनसे रोज हजारों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। जिम्मेदार पाइप लाइनों को सही कराने के लिए संजीदा नहीं हैं। इससे पेयजल संकट बढ़ रहा है।
दस वर्ष पहले शुरू की गईं खरेला, रिवई और सुदामापुरी सामूहिक पेयजल योजनाएं मंसूबों पर खरी नहीं उतर रही हैं। इन योजनाओं पर लाखों रुपये हर साल खर्च होते हैं। इसके बावजूद इनका इलाकाई लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। चरखारी के अर्जुन बांध के फिल्टर प्लांट से चरखारी के साथ ही सुदामापुरी, रिवई, छानी और खरेला नगर क्षेत्र की बड़ी आबादी पेयजल के लिए निर्भर है।
इस वर्ष बारिश न होने से अर्जुन बांध में दो -तीन माह तक के लिए ही पानी बचा है। विभागीय लापरवाही के चलते पिछले तीन माह से पेयजल आपूर्ति पूरी तरह ध्वस्त है। आबादी को कभी कभार ही पानी की आपूर्ति मिल पाती है। 15 दिनों से बढ़ी गर्मी से बूंद -बूंद पानी के लिए मारामारी की नौबत है। बांध से सप्लाई होने वाला पानी चरखारी से जतौरा और रिवई के बीच टूटी पाइप लाइनों से बह कर बर्बाद हो रहा है।
आठ दिनों से टूटी पाइप लाइन से गड्ढों और खेतों में जल भराव हो गया। विभाग ने पाइप लाइन सुधार के लिए कोई प्रयास नहीं किया । खरेला के व्यापार मंडल अध्यक्ष राजू गुप्ता, जिला मंत्री मेवालाल गुप्ता, सुशील गुप्ता, महेंद्र और कौशलेंद्र भदौरिया ने बताया कि पानी की आपूर्ति सुधार के लिए कई बार विभाग को अवगत कराया गया। कोई सुनवाई नहीं हुई।
इस मामले में जल संस्थान के जेई एसके वर्मा ने बताया कि पाइप लाइन टूटी हैं। इन्हें सुधरवाया जा रहा है। पानी की आपूर्ति जल्द बहाल कराई जाएगी।
लाइन तोड़ने वालों पर कार्रवाई से कतरा रही पुलिस
चरखारी से जतौरा, रिवई और खरेला के बीच मेन पाइप लाइन को दबंग तोड़ देते हैं। इससे पानी की बर्बादी होती है। इन दबंगों के खिलाफ विभाग ने चरखारी कोतवाली पुलिस से शिकायतें कीं। पुलिस दबंगों पर कार्रवाई नहीं करती है।
जेई एसके वर्मा ने बताया कि पाइप लाइन तोड़कर सिंचाई करने और पानी बर्बाद करने वालों को चिन्हित कर चरखारी पुलिस से छह लोगों के विरुद्ध शिकायत दी थी। पुलिस के कार्रवाई न करने से इनके हौसले बुलंद हैं। आरोपी बार - बार पाइप लाइन तोड़कर चार गांवों की पेयजल आपूर्ति ठप कर देते हैं।