सीएमओ एसके वार्ष्णेय ने कहा कि रक्तदान महादान है।
रक्तदान से किसी की जिंदगी बचाई जा सकती है, इससे बड़ा कोई भी पुण्य कार्य
नहीं है। उन्होंने बताया कि रक्तदान से किसी भी तरह की कमजोरी नहीं आती।
सीएमओ रविवार को विश्व रक्तदान दिवस पर जिला अस्पताल में आयोजित गोष्ठी में
बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि तीन माह बाद दोबारा रक्तदान किया जा
सकता है। रक्तदान करने से नए खून का तेजी से संचार होता है। महीने भर में
दान किया गया खून बन जाता है। भ्रांतियों के कारण आज भी लोग रक्तदान से
कतराते हैं। कहा कि रक्तदान करने वाले लोग बीमार नहीं होते, उनका शरीर
स्वस्थ रहता है, इसलिए समय-समय पर रक्तदान अवश्य करना चाहिए।
सीएमएस
उदयवीर सिंह ने कहा कि समय-समय पर रक्तदान शिविर आयोजित कर लोगों को
रक्तदान के लिए प्रेरित किया जाता है। बताया कि आप लोगों द्वारा दान किया
गया खून ब्लड बैंक में रख दिया जाता है।
जरूरतमंदों को ब्लड देकर
उनकी जान बचाई जाती है। इस मौके पर साहित्य परिषद के अध्यक्ष रमेश जैदका,
डीएवी इंटर कालेज के पूर्व प्रधानाचार्य शिवकुमार गोस्वामी सहित तमाम
वक्ताओं ने रक्तदान के प्रति जागरूक किया।
रक्तदान को लेकर जागरूकता
के कार्यक्रम तो हुए, किंतु जिले में एक भी व्यक्ति रक्तदान नहीं कर सका।
कारण जिला अस्पताल का पैथालॉजिस्ट इन दिनों छुट्टी पर है और सीएमएस ने
रक्तदान के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की। इस कारण रक्तदान करने
पहुंचे लोगों को बैरंग वापस लौटना पड़ा।
यह पहला मौका है जब विश्व
रक्तदान दिवस पर एक भी व्यक्ति रक्तदान नहीं कर सका। विश्व रक्तदान दिवस पर
रक्त लेने की बजाय गोष्ठी आयोजित कर रस्म अदायगी की गई। सीएमएस का कहना है
कि पैथालॉजिस्ट के छुट्टी पर होने के कारण रक्तदान नहीं हो सका।
पैथालॉजिस्ट के आने के बाद रक्तदान शिविर आयोजित कराया जाएगा।