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श्रीराम से प्रेरणा लेकर बनें चरित्रवान: जगद्गुरु

Wed, 06 May 2015 11:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो महोबा
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जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि मनुष्य का जन्म पाकर मानव को इस शरीर को उत्तम कार्यों में लगाकर जीवन धन्य बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुख और दुख के साथ-साथ जीवन के प्रत्येक क्षण में भगवान का स्मरण करने से मन को शांति मिलती है।
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जगद्गुरु मंगलवार की देर शाम शहर के सिद्धपीठ मां बड़ी चंडिका मंदिर परिसर में आयोजित श्रीराम कथा का श्रद्धालुआें को रसपान करा रहे थे। उन्हाेंने कहा कि भगवान शिव की पूजा से उत्तम फल की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि वनवास के दौरान भगवान श्रीराम ने भी शिवलिंग की स्थापना कर मनोवांछित फल प्राप्त किया था। उन्होंने बताया कि रामेश्वरम में भोलेनाथ की आराधना के बाद श्रीराम ने लंका पर विजय प्राप्त की उन्हाेंने कहा कि मनुष्याें को भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र से मर्यादा में रहकर जीवन जीने की प्रेरणा लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने आदर्शों पर चलकर अपने पिता की आज्ञा का पालन किया। हमें भी भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र के अनुसार ही जीवन व्यतीत करना चाहिए। इस दौरान उन्हाेंने भजन सुनाकर श्रद्धालुआें को भाव विभोर कर दिया। कथा सुनने के लिए भक्ताें की भारी भीड़  जुटी रही ।

रामलीला देख दर्शक हुए मंत्रमुग्ध
रामकथा के अवसर पर रात में आदर्श रामलीला एवं नाटक संगीत समिति भटेवर के कलाकाराें ने रामलीला का शानदार मंचन किया। रामलीला के शुभारंभ में व्यास पीठ पर उपस्थित बांदा से पधारे बद्री प्रसाद शर्मा ने शास्त्रीय गायन प्रस्तुत किया। पं. जगप्रसाद तिवारी ने तबला से तीनताल पर आधारित शोलोवादन प्रस्तुत किया। नाल पर रामनिधि आर्गन पर दीपक सिंह और बैंजो पर मास्टर जगन्नाथ ने संगत की। नारद का अभिनय पं. महेश्वरीदीन तिवारी ने, भगवान विष्णु का मनोज द्विवेदी ने अभिनय किया। हास्य कलाकार लालजी दीक्षित ने दर्शकाें को खूब हंसाया। इस अवसर पर महंत विशंभरदास, पूर्व प्रधान पं. रामसेवक तिवारी, नीरज रावत, लायक सिंह, डॉ. जयशंकर बुधौलिया, हिंदू युवा वाहिनी के आशीष महाराज, पंकज द्विवेदी, सुशांत खरे सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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रामकथा का समय बदला
भीषण गर्मी और तेज धूप के चलते शहर के बड़ी चंडिका मंदिर में चल रही श्रीराम कथा के समय में परिवर्तन कर दिया गया है। पूर्व में श्रीराम कथा का समय अपराह्न तीन बजे से शाम छह बजे तक निर्धारित किया गया था। लेकिन अब कथा का समय परिवतर्तित कर शाम छह बजे से रात आठ बजे तक कर दिया गया है। जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने श्रद्धालुआें से निर्धारित समय पर कथा में आने की अपील की है।
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