महोबा। जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ 2024 में हुए करोड़ों के घोटाले के बाद रबी सीजन 2024 में भी फसल बीमा के क्लेम भुगतान में मनमानी का खुलासा हुआ है। कुलपहाड़ तहसील के छह में से चार गांवों में दलालों, बीमा कंपनियों व कृषि विभाग के कर्मचारियों की मिली-भगत से लाखों रुपये के बीमा क्लेम चुनिंदा किसानों के नाम पर दिया गया जबकि इनके पास के ही दो गांवों के किसानों को कोई क्लेम नहीं मिला। ऐसे में वास्तविक नुकसान का आकलन किए बिना और बिना किसी नुकसान के ही बीमा क्लेम जारी किए जाने की आशंका है।
ब्लॉक जैतपुर के भगारी गांव में 186 हेक्टेयर जमीन पर 119 किसानों ने रबी की फसल का बीमा कराया था। व्यक्तिगत दावों के आधार पर 11 लाख रुपये के क्लेम का भुगतान किया गया। वहीं, नगाराडांग गांव में 190 हेक्टेयर जमीन पर 141 किसानों ने बीमा कराया था, जिसके लिए 11 लाख रुपये का व्यक्तिगत क्लेम दिया गया। पास के ही गांव इंद्रहटा में 485 हेक्टेयर जमीन पर 386 किसानों ने बीमा कराया था, जिसमें से चुनिंदा किसानों को 23 लाख रुपये का क्लेम दिया गया। सलैयामाफ गांव के 230 किसानों ने 375 हेक्टेयर जमीन में बीमा कराया था।
व्यक्तिगत दावों के आधार पर कुछ चुनिंदा किसानों के खातों में 27 लाख रुपये भेजे गए जबकि इन्हीं गांवों के समीपी बिजौरी गांव की 108 हेक्टेयर जमीन पर फसल बीमा कराने वाले 103 में से एक भी किसान को फसल बीमा का क्लेम नहीं मिला। इसी तरह रजपुरा गांव के 121 किसानों ने 103 हेक्टेयर जमीन पर फसल बीमा कराया लेकिन उन्हें भी कोई क्लेम नहीं दिया गया। इस तरह से आशंका व्यक्त की जा रही है कि इस योजना का दुरुपयोग कर बड़ी रकम की हेराफेरी की गई है। यह मामला तब और गंभीर हो जाता है जब इसमें बीमा कंपनी के अधिकारियों की संलिप्तता की बात कही जा रही है।
जय जवान जय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष गुलाब सिंह राजपूत कहते हैं कि यह घोटाला सरकारी योजनाओं को लागू करने वाली मशीनरी में व्याप्त भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। खरीफ 2024 सीजन में भी इसी तरह के घोटाले सामने आए थे, इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि यह एक सुनियोजित तरीका है। फर्रुखाबाद जैसे जिलों में जहां 68 लाख रुपये के घोटाले में बैंक शाखा प्रबंधकों सहित कई लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गई है, वहीं महोबा में अभी तक किसी भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी पर जांच की आंच न पहुंचना चिंता का विषय है। महोबा तहसील में धरने पर बैठे किसान भी मांग कर रहे हैं कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच हो। किसानों के हितों की रक्षा के लिए कड़े कदम उठाए जाएं, ताकि वे अपनी मेहनत का उचित फल पा सकें।