लोगो == पड़ताल का ==
- किसी का काटा नाम, बारिश के बाद नमी से गिरे 20 और मकान
-अब बारिश में गिरे मकान, पालीथिन व पुरानी साड़ियों की आड़ लगाकर गुजार रहे जिंदगी
फोटो 07 एमएएचपी 03 परिचय-गिरा कच्चा मकान दिखाता रामकिशोर। संवाद
फोटो 07 एमएएचपी 04 परिचय-मासूम बच्चे को गोद में लेकर कच्चा मकान गिरने से हो रही परेशानी बताती कौशल्या। संवाद
फोटो 07 एमएएचपी 05 परिचय-आवास न मिलने पर पन्नी तानकर रहने को मजबूर विनीता। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
खन्ना (महोबा)। विकासखंड कबरई के ग्योड़ी गांव में बारिश थमने के बाद भी गरीबों की आफत कम नहीं हो रही है। लगातार बारिश से दीवारों में पहुंची नमी से कच्चे मकानों के गिरने का सिलसिला जारी है। 24 घंटे के अंदर ग्योड़ी गांव में 20 से अधिक कच्चे मकान ढह गए। मलबे में दबकर गरीबों की हजारों की गृहस्थी बर्बाद हो गई। बारिश में मकान गिरने से पीड़ित पालीथिन और पुरानी साड़ियों की आड़ लगाकर जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं। कई पीड़ित ऐसे हैं, जिन्होंने सरकारी आवास के लिए कई बार आवेदन किए लेकिन लाभ नहीं मिला।
जिले में एक पखवाड़े हुई लगातार बारिश के बाद सोमवार को दिन में धूप निकली लेकिन कच्चे मकानों के गिरने का सिलसिला जारी रहा। ग्योड़ी गांव में कौशल्या, बाबूलाल, देवीदीन, सुशीला, जयकरन, केसर, रामकुमार, फूलन, दीपक, विनीता, रामकिशोर समेत 20 से अधिक गरीबों के कच्चे मकान भरभराकर गिर गए। मलबे में दबकर गृहस्थी व कीमती सामान बर्बाद होने से पीड़ित परिवार परेशान हैं।
पीड़िता विनीता ने बताया कि उनका मकान कई वर्षों से जर्जर था। किसी तरह काम चलाया जा रहा था। आवास के लिए पांच बार आवेदन किया लेकिन सूची में उनका नाम नहीं आया। पीड़िता ने विभागीय अधिकारियों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। बताया कि अब मकान गिरने से वह पालीथिन तानकर और पुरानी साड़ियों की आड़ लगाकर किसी तरह काम चला रही हैं। सर्वे टीम ने आकर जांच की है और आर्थिक सहायता दिलाने का भरोसा दिया है लेकिन यह सहायता कब मिलेगी, इसका पता नहीं हैं।
उधर, ग्राम विकास अधिकारी सर्वेश मिश्रा का कहना है कि गांव में 400 से अधिक परिवारों का जियो टैग किया गया था। उस समय कुछ परिवार ईंट-भट्ठे में गए थे। पात्रों को प्राथमिकता के आधार पर आवास दिलाया जाएगा। जिन पीड़ितों के घर गिरे हैं, उनका सर्वे कराया जा रहा है।
फोटो 07 एमएएचपी 06 परिचय-रामकुमार। संवाद
प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए किया था आवेदन
ग्योड़ी गांव निवासी रामकुमार ने बताया कि उसने पत्नी रामकुमारी के नाम प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन किया था। सूची में नाम आने के बाद भी आवास का लाभ नहीं मिला। अब बारिश में घर गिरने से परेशानी बढ़ गई है। यदि समय पर लाभ मिलता तो यह दिन नहीं देखना पड़ते।
बहू के नाम से किया था आवेदन, कट गया नाम
फोटो 07 एमएएचपी 07 परिचय-फक्कड़। संवाद
ग्रामीण फक्कड़ ने बताया कि अपनी बहू नैना के नाम आवास के लिए आवेदन किया था लेकिन विभाग की लापरवाही से नाम काट दिया गया। अब वह बारिश में पालीथिन डालकर किसी तरह रात गुजार रहे हैं। मवेशियों को खुले में बांधना मजबूरी बना है।
फोटो 07 एमएएचपी 03 परिचय-गिरा कच्चा मकान दिखाता पीड़ित रामकिशोर। संवाद
फोटो 07 एमएएचपी 03 परिचय-गिरा कच्चा मकान दिखाता पीड़ित रामकिशोर। संवाद
फोटो 07 एमएएचपी 03 परिचय-गिरा कच्चा मकान दिखाता पीड़ित रामकिशोर। संवाद
फोटो 07 एमएएचपी 03 परिचय-गिरा कच्चा मकान दिखाता पीड़ित रामकिशोर। संवाद