जिले में लागू किया गया खाद्य सुरक्षा कानून गरीबों के लिए मुसीबत बन गया है। हालत यह है कि पांच किलो गेहूं पर गुजारा करने वाले गरीबों को अब इस कानून के लागू हो जाने के बाद वह भी मिलना बंद हो गया है। कारण ये है कि कोटेदारों ने एपीएल कार्डों पर खाद्यान्न का वितरण बंद कर दिया है।
जिले में सूखे के चलते जहां लोगों के लिए दो जून की रोटी का जुगाड़ करना मुश्किल हो गया है। वहीं जिला प्रशासन ने खाद्य सुरक्षा बिल तो लागू कर दिया है लेकिल जिले में 50 फीसदी से ज्यादा लोगों के पास कार्ड न होने के कारण लोगों को कोटेदारों ने एपीएल कार्ड पर मिलने वाला पांच किलो गेहूं भी बंद कर दिया है।
जिससे सूखे के संकट में गरीबों को सरकारी दुकानों से खाद्यान्न भी नहीं मिल रहा है। जिस कारण आए दिन कोटेदारों और कार्ड धारकों के बीच झगड़ा होता रहता है। जिले में 26 हजार 700 से ज्यादा कार्ड धारक है। जिन्हें प्रति यूनिट पांच किलो गेहूं दिए जाने का प्रावधान है। लेकिन ज्यादातर कार्डधारक राशन की दुकानों से बैरंग लौटा दिए जाते हैं।
एपीएल कार्ड धारकों का कहना है कि वह दो बार कोटेदार को फार्म भरकर दे चुके हैं। एक बार कैफे से ऑनलाइन भी फार्म भर चुके हैं लेकिन अभी तक उनके खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्ड नहीं बने हैं। इससे एपीएल कार्ड धारकों में खासा आक्रोश है।
डीएसओ कमलेश कुमार गुप्ता ने बताया कि जिले के कार्ड धारकों के लिए 31 दिसंबर को भारत सरकार से तीन माह के लिए मिले आवंटन के हिसाब से सभी कार्ड धारकों को हर महीने राशन बांटा जा रहा है। खाद्य सुरक्षा कानून के तहत तमाम लोगों ने नए राशन कार्ड बनवा लिए हैं। नए कार्ड धारकों को आवंटन आने पर उन्हें खाद्यान्न वितरित किया जाएगा।