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गायों का हुआ पोस्टमार्टम, पेट में पन्नी और सुतली मिली

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चरखारी (महोबा)। क्षेत्र में मेला मैदान के पास स्थित अस्थायी गोशाला में तीन गायों की मौत के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। शुक्रवार को पशु चिकित्सकों की टीम ने गोशाला जाकर 70 गायों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। इनमें सात गाय बीमार मिली, जिनका इलाज किया गया। इधर, गायों का दो पशु चिकित्सकों ने पोस्टमार्टम किया। इसके बाद शवों को दफना दिया गया।
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गोशाला में बुधवार की रात तीन गायों की मौत हो गई थी। गुरुवार को मामला डीएम सत्येंद्र कुमार के संज्ञान में आया तो प्रशासन हरकत में आ गया। सीडीओ के आदेश पर शुक्रवार को पशु चिकित्सक डॉ. मरकध्वज सिंह और डॉ. रवींद्र सिह राजपूत टीम के साथ गोशाला पहुंचे और वहां रह रही करीब 70 गायों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। डॉक्टरों के मुताबिक गोशाला की सात गायें बीमार मिली है, जिनका इलाज किया गया है।
इधर, सीडीओ के आदेश पर इन्हीं दोनों डॉक्टरों ने मृत गायों का पोस्टमार्टम किया। बताया कि तीनों गायों के पेट में प्लास्टिक की पन्नी और सुतली मिली है। इससे गायों का लीवर खराब हो गया था। यही इन गायों की मौत की वजह मानी गई है। वहीं, एडीएम की अगुवाई में गठित टीम देर शाम तक गायों की मौत की जांच के लिए गोशाला नहीं पहुंची। इस बारे में एडीएम का कहना है कि जांच के बारे में अभी डीएम का आदेश नहीं मिला है।
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गोशाला में गोवंश की मौत हुई तो जिम्मेदार पर होगी कार्रवाई महोबा। चरखारी की अस्थायी गोशाला में हुई तीन गायों की मौत के मामले को डीएम सत्येंद्र कुमार ने गंभीरता से लिया है। गुरुवार को डीएम ने आदेश जारी कर गोशाला से जुड़े अफसरों को गोवंशों को ठंड से बचाने के इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा कि बीमार गोवंशों के इलाज के लिए 24 घंटे पशु चिकित्सक मुस्तैद रहे।
चरखारी के मेला मैदान के सामने बनी गोशाला में बुधवार की रात तीन गायों की मौत हो गई थी। शुक्रवार को इसका खुलासा हुआ था। इसके बाद डीएम एक्शन में आ गए हैं। उन्होंने आदेश जारी कर अफसरों से कहा कि ठंड का मौसम शुरू हो गया है। इस लिए गोवंश संरक्षण के लिए सजगता जरूरी है। गोशाला में गोवंश भूख या बीमारी से नहीं मरने चाहिए। इस लिए हरे चारे, भूसे और बोरों आदि की व्यवस्था सुनिश्चित कर लें। अगर भूख या बीमारी से गोशाला में गोवंश की मौत होती है तो जिम्मेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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