फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mahoba News: मौत के गम के बीच हर जुबां पर रही राजेंद्र और प्रदीप की दोस्ती की दास्तां

Sat, 27 Dec 2025 12:17 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
विज्ञापन
फोटो 26 एमएएचपी 12 परिचय-घटना के बाद रोते-बिलखते मृतक राजेंद्र के परिजन। संवाद
विज्ञापन
महोबा/मौदहा। कानपुर-सागर हाईवे पर खन्ना पावर हाउस के पास हुई दुर्घटना में जान गंवाने वाले दोनों युवकों की मौत के बाद से दोस्ती के चर्चे लोगों की जुबां पर हैं। बचपन से साथ रहकर हर काम मिलजुलकर करने वाले दोनों दोस्त आखिरी सफर में एक साथ ही निकल गए। शुक्रवार की देर शाम जब युवकों के शव घर पहुंचे तो परिजन दहाड़े मारकर रोते-बिलखते दिखे।
विज्ञापन

जनपद हमीरपुर के मौदहा कस्बे में रहने वाले प्रदीप बाल्मीकि (30) व राजेंद्र अनुरागी (28) की उम्र में भले ही दो वर्ष का अंतर था लेकिन दोनों बचपन से ही एक साथ खेले और बड़े हुए। पढ़ाई-लिखाई के साथ ही अक्सर ही उन्हें हर काम में साथ देखा जाता था। परिवार के लोग बताते हैं कि दोनों के घर की माली हालत खराब थी। इसलिए प्रदीप ने 15 वर्ष की उम्र से ही शादी समारोह आदि कार्यक्रमों में फोटोग्राफी का कार्य शुरू कर दिया जबकि राजेंद्र के माता-पिता ने मजदूरी करके राजेंद्र को पढ़ने के लिए प्रेरित किया। करीब नौ माह पहले ही राजेंद्र को सतना रेलवे स्टेशन में टीसी की नौकरी मिली थी। दो दिन पहले जैसे ही राजेंद्र को छुट्टी मिली तो वह घर आकर प्रदीप से मिलने गया। प्रदीप ने कबरई के कार्यक्रम में जाने के कारण व्यस्तता की बात कही तो कई महीनों बाद मिले दोस्त के साथ ही जाने के लिए राजेंद्र तैयार हो गया। दोनों दोस्त कबरई के कार्यक्रम में एक साथ रहे और लौटते समय हुई सड़क दुर्घटना में दोनों दोस्त प्रदीप व राजेंद्र की मौत हो गई। जब दोनों की मौत की सूचना गांव के लोगों को मिली तो सभी लोग दोनों की दोस्ती की चर्चा करते रहे। देर शाम शव पहुंचने पर गांव में माहौल गमगीन हो गया।
-
मजदूरी करके इकलौते बेटे को पढ़ाया
दुर्घटना में जान गंवाने वाले राजेंद्र के चचेरे भाई संजय ने बताया कि राजेंद्र घर में इकलौता था। उसके पिता मुन्नालाल और मां ज्ञानदेवी ने मजदूरी करके किसी तरह से राजेंद्र को पढ़ने के लिए रुपयों की व्यवस्था की थी। बड़ी उम्मीदों के बीच राजेंद्र को मध्यप्रदेश के सतना रेलवे स्टेशन में टीसी के रूप में नौकरी मिली थी। इस नौकरी से सभी लोग खुश थे। पिता मुन्नालाल अब अच्छा घर बनाने की तैयारी कर रहे थे तो वहीं मां ज्ञानदेवी जल्द ही राजेंद्र की शादी करके घर में बहू बुलाने की तैयारी में थी। दो दिन पहले ही राजेंद्र घर आया और अपने दोस्त प्रदीप के साथ चला गया। अब मौत की खबर आने पर उसके माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है।
विज्ञापन



मौत के बाद पत्नी व बेटी की हालत बिगड़ी
इस घटना के दूसरे मृतक प्रदीप के छोटे भाई संदीप बाल्मीकि ने बताया कि प्रदीप ने घर की माली हालत को देखते हुए 15 साल की उम्र से ही फोटोग्राफी शुरू कर दी थी। इसी से वह पूरे परिवार का भरण पोषण करता था। इस घटना के बाद से प्रदीप की पत्नी किरन और बेटी प्राकी का रो-रोकर बुरा हाल है। दोनों की हालत बिगड़ने से परिवार के लोग खासे परेशान रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें