महोबा। वैश्विक महामारी की चपेट में आकर कई परिवार उजड़ गए। माता- पिता की मृत्यु के बाद बहुत से बच्चे अकेले रह गए हैं। ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता दोनों की कोरोना से मृत्यु हो गई है इसको लेकर टास्क फोर्स का गठन किया गया था। जिसमें टीम द्वारा खोजने पर ऐसा एक बच्चा मिला है जिसके माता पिता दोनों की मृत्यु हो गई हो गई। जिले में 11 बच्चे ऐसे मिले हैं जिन्होंने माता या पिता में से किसी एक को खो दिया है। ऐसे बच्चों के खास कर जिन परिवारों ने पिता को खो दिया है उनके मां को परिवार चलाने और मासूमों की पढ़ाई लिखाई की चिंता सता रही है।
भीतर कोट गांव निवासी नाजिया कहतीं है कि पति की कोरोना संक्रमण से मृत्यु हो चुकी है। घर का मुखिया खो देने से परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। मेरे दो बच्चे हैं, अब बच्चों की पढ़ाई की चिंता सता रही है। शासन से कोई मदद मिलती जिंदगी की गाड़ी आगे बढ़ जाती।
अमृत कालोनी निवासी केशरानी कहती हैं कि पति की मौत के बाद दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है। बेटी रचना की पढ़ाई अब कैसे होगी समझ नहीं आ रहा है। सरकार द्वारा कोई मदद मिलती तो थोड़ी राहत मिल जाती। आस-पास केे लोग सिर्फ सात्वना देते हैं मदद कोई नहीं करता है।
- इन बच्चों ने खोए माता-पिता
टीम द्वारा सत्यापन करने पर तमन्या, मुइनुद्दीन, रचना, विनय, अवंतिका, पवन, राहुल, नजारिफ, नजरीन, आशी सिंह, चंचल, लवली उर्फ लक्ष्मी हैं वहीं हिमांशु पाठक के माता-पिता दोनों की मृत्यु हो गई है।
- प्रभारी जिला प्रोबेशन अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि ऐसे बच्चे जिनके माता या पिता की कोरोना संक्रमण से मौत हुई हैं उन्हें हर माह स्पांसरशिप योजना के तहत दो हजार रुपये की राशि तीन साल या बच्चे के बालिग होने तक लाभ प्रदान किया जाएगा।