जिले में एम्स की मांग को लेकर समाजसेवी तारा पाटकार 136 दिन से उपवास पर बैठे हैं। इस दौरान उन्होंने अन्न का दाना ग्रहण नहीं किया और सिर्फ फल-सब्जी से गुजारा कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर यहां एम्स बन जाए तो बुंदेलखंड के 16 जिलों के करीब दो करोड़ लोगों को इसका लाभ मिलेगा।
बुंदेलखंड के लोगों को हक दिलाने के लिए तारा पाटकार लंबे समय से लड़ाई लड़ रहे हैं। सूखे के चलते गरीबों को दो वक्त का भोजन नसीब न होने पर उन्होंने अपने साथी हाजी मुट्टन चच्चा के साथ अप्रैल 2015 में रोटी बैंक की शुरूआत की।
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घर-घर जाकर दो रोटी और सब्जी इकट्ठी करने के बाद गरीबों के घर तक पहुंचाया। आठ माह से गरीबों को भोजन करा रहे रोटी बैंक के संयोजक तारा पाटकार ने महोबा में एम्स की मांग को लेकर करीब चार माह पहले आल्हा चौक पर उपवास शुरू किया। 136 दिन बीत जाने के बाद भी अन्न का एक दाना नहीं ग्रहण किया। जबकि दूसरों को हर रोज रोटी बैंक के जरिए भोजन कराया जा रहा है।
बुंदेलखंड का हृदय स्थल महोबा यूपी और एमपी के 16 जनपदों के बीच बसा है। बुंदेलखंड के दो करोड़ लोगों को एम्स का लाभ दिलाने के लिए समाजसेवी तारा पाटकार उपवास स्थल पर डटे हैं। कभी फल तो कभी सब्जी और मूली का सेवन करके वक्त गुजार रहे हैं।
तारा पाटकार का कहना है कि मूली और फल से पेट नहीं भरता। लेकिन बुंदेलखंड के लोगों को एम्स दिलाने के लिए किसी न किसी को त्याग करना पड़ेगा। तभी बुंदेलखंड के 16 जिलों के बाशिंदों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।