महोबा/श्रीनगर। पिपरमेंट की खेती ने किसानाें की तकदीर बदल दी है। हाड़तोड़ मेहनत के बाद भी हर समय फटेहाल और परेशान रहने वाला किसान दो सालाें में ही खुशहाल हो गया और अब एक बार फिर उसके संपन्न होने के आसार दिखने लगे हैैं।
सालभर दिन रात तेज धूप और लू के थपेड़ाें के बीच खेती करने के बाद भी किसान कर्जदार और परेशान रहता था। यहां तक कि पूरी साल मेहनत करने के बाद भी खाद, बीज और सिंचाई का पैसा निकालने के बाद दो जून की रोटी की बमुश्किल जुगाड़ हो पाता था। बेटियाें के हाथ पीले करने के लिए किसान को बैंक और साहूकाराें से कर्ज लेना पड़ता था। लेकिन रबी और खरीफ की अच्छी पैदावार न होने के कारण किसान कर्ज की अदायगी नहीं कर पाता था। कर्ज से परेशान होकर कई कृषकाें ने कृषि कार्य से नाता ही तोड़ लिया था। वहीं कुछ किसानाें ने बदलते जमाने के साथ अपने को बदलकर गेहूं, चना, जौ और दलहन, तिलहन की फसल को किनारे कर दो साल पहले पिपरमेंट की खेती को अपना लिया। ये सभी किसान अब खुशहाल हैं। किसान एक साल में दो बार पिपरमेंट की फसल ले रहे हैं। एक बीघा में 10 हजार की फसल के स्थान पर अब 40 हजार रुपए का पिपरमेंट का तेल निकाला जा रहा है। चार गुना उत्पादन बढ़ने से किसानाें की किस्मत खुल गई है। नतीजतन क्षेत्र के किसान अब तेजी से पिपरमेंट की खेती से जुड़ रहा है। ग्राम अतरारमाफ, इमिलिया, टपरनपुरवा, शमशेरा, फुटेरा, डिगरिया, कैमाहा, मवई, ज्योरइया, सिजरिया, चांदों, चंदपुरा सहित आधा सैकड़ा गांवाें के किसानाें ने पिपरमेंट की खेती को अपना लिया है।