श्रीनगर (महोबा)। बैंक के तीन लाख के कर्जदार किसान के मजदूर पुत्र ने फांसी लगाकर जान दे दी। पुत्र अपने पिता के कर्ज की अदायगी न हो पाने से परेशान था। मृतक के तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं। पुलिस ने शव का पंचनामा कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
कसबे के मोहल्ला देवबाग निवासी राजेंद्र प्रसाद नाई के पास छह एकड़ भूमि है। इसी से उसके परिवार को गुजारा चलता है। कई सालों से अच्छी पैदावार न होने के कारण राजेंद्र प्रसाद ने वर्ष 2006 में इलाहाबाद बैंक शाखा से किसान क्रेडिट कार्ड एवं किसान शक्ति कार्ड से जमीन बंधक रखकर 2.70 लाख रुपये का कर्ज लिया था। इसके बाद साधन सहकारी समिति से 30 हजार का ऋण खाद बीज के लिए लिया था। राजेंद्र खेतों में पैदावार न होने से खासा परेशान रहता था। यह बात उसने अपने बेटे खेमचंद से बताई थी। पिता के कर्ज को लेकर बेटा भी उसकी अदायगी को लेकर परेशान रहने लगा था।
राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि रविवार को उसे और खेमचंद्र को छोड़कर परिवार के सभी लोग गांव में एक शादीमें गए थे। शाम को हम दोनों के बीच कर्ज की बाबत बातचीत हुई। दोनों ही लोग कर्ज वापसी का कोई रास्ता न मिलने से बेतरह परेशान थे। बातचीत के बाद रविवार की रात को खेमचंद्र (30) अपने कमरे में चला गया। जहां पर उसने रात में किसी समय फांसी लगाकर जान दे दी। सुबह दरवाजे खोलने पर देखा तो वह फांसी से लटका मिला।
इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक किसान के वृद्ध पिता ने बताया कि पुत्र मजदूरी कर परिवार का गुजर बसर कर रहा था। लेकिन मेरे कर्ज को लेकर वह खासा परेशान था। जवान बेटे की मौत से मृतक की मां गोमती को जबरदस्त सदमा लगा है। वह सुधबुध खो बैठी है। उसकी आंखों से आंसू नहीं निकल रहे हैं। मृतक की पत्नी पिंकी का कहना है कि गरीबी के कारण घर में आर्थिक तंगी थी। कर्ज का बोझ पति के लिए चिंता बना हुआ था। मृतक अपने पीछे दो पुत्र अमित (7), सुमित (5) और पुत्री निशा (2) छोड़ गया है।