महोबा। प्रशासनिक उदासीनता के चलते जिले के चंदेल कालीन तालाबाें का अस्तित्व खत्म होता जा रहा है। अब इन तालाबाें में न तो जल भंडारण क्षमता रह गई है और न ही घाट बचे हैं। जल भंडारण क्षमता घट जाने से तालाब चारागाह बनकर रह गए हैं।
90 हेक्टेयर भूमि में बना चंदेल कालीन मदन सागर तालाब की भूमि पर एक तरफ मकान बनते जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ तालाब की जमीन पर सड़क बना दी है। इससे तालाब का क्षेत्रफल सिकुड़ता जा रहा है। वहीं मकान और सड़क बन जाने से तालाब में बारिश के पानी की आमद कम हो गई है। शहर के बीचोंबीच बने मदन सागर सरोवर से शहर में पानी की आपूर्ति की जाती है। साथ ही सिंचाई के लिए भी लोग पानी का इस्तेमाल करते हैं। इस सरोवर की 2008 में खुदाई कराई गई थी। लेकिन तालाब का दसवां हिस्सा भी नहीं खुद सका था और बारिश शुरू हो गई थी।
चंदेल कालीन कीरत की पांच साल पहले खुदाई की गई थी लेकिन खुदाई के नाम पर महज औपचारिकता की गई, इसी तरह कीरत सागर के दो तरफ मकान बन गए, इससे कीरत सागर में बारिश का पानी नहीं आ पाता है। जिससे सरोवर में जल भंडारण क्षमता दिन प्रतिदिन घटती जा रही है। जिससे किसानाें को सिंचाई के लिए पानी मयस्सर नहीं हो पा रहा है।कमोवेश यही हाल चंदेल कालीन सरोवर कल्याण सागर का है। यहां पर तालाब की जमीन पर भारी संख्या में मकान बन गए हैं।
दशकाें से नहीं हुई तालाबाें की खुदाई
दशकाें से चंदेल कालीन तालाबाें की खुदाई न होने के कारण तालाबाें में पानी नहीं भर पाता है। जिससे किसानाें को सिंचाई सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। 11वीं शताब्दी में मदन सागर, कीरत सागर, कल्याण सागर और विजय सागर सरोवरों का चंदेल राजाओं ने निर्माण कराया था। इन तालाबों के एक हिस्से में नहाने धोने के लिए घाट बनाए थे। तीन हिस्सों में स्लोप बनाया था। जिससे बारिश के पानी से तालाब भर सकें। कई सौ साल बीत जाने के कारण इन तालाबों में कई-कई मीटर सिल्ट जमा हो गई है। जिससे तालाबाें की जल भंडारण क्षमता खत्म हो गई है। इससे सिंचाई सुविधा प्रभावित है।
अपने नाम करा ली तालाब की जमीन
राजस्व विभाग के अधिकारियों और भू माफियाआें की सांठगांठ के चलते जिले का नक्शा गायब हो गया है। ये नक्शा अब रुड़की तक में नहीं है। इसकी जानकारी जिले के अफसराें ने शासन को भी दे दी है। नक्शा गायब हो जाने से भूमाफिया ने तालाबाें की जमीन अपने नाम करा ली है और धड़ल्ले से तालाबाें के किनारे बिक्री कर मकान बनवा दिए हैं। जिससे तालाबाें में पानी की आमद खत्म हो गई है। बारिश का तालाबाें में आने वाला पानी भी अब कम आ पाता है। अधिक बारिश होने पर तेज रफ्तार पानी अपना रास्ता बना लेता है और तालाब लबालब हो जाते हैं लेकिन जल भंडारण क्षमता कम होने से तालाबाें के फाटक खोलकर पानी बहा दिया जाता है।