महोबा। गुजरात की तर्ज पर यूपी में नगर निकाय चुनाव में अनिवार्य कानून लागू करने के मामले में जनप्रतिनिधियों ने अपनी राय दी तो बहस रोचक हो गई। लोगों ने जहां इस कानून की सराहना करते हुए इसे यूपी में भी लागू करने की जरूरत पर बल दिया। वहीं जनप्रतिनिधियाें ने मिले जुले कमेंट दिए। भाजपा नेताओं ने इसकी सराहना करते हुए इसका स्वागत किया। अन्य दलों के नेताओं ने इसे भाजपा का तानाशाही फरमान बताते हुए जोर जबरदस्ती करार दिया।
चुनाव में 100 फीसदी मतदान कराने का यह सबसे अच्छा तरीका है। चुनाव में मतदान करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार होने के साथ ही कर्तव्य भी है। गुजरात सरकार की यह पहल काबिले तारीफ है। बल्कि मैं तो यही कहूंगा कि प्रदेश सरकार को यह कानून यूपी में लागू कर देना चाहिए। - पुष्पेंद्र सिंह चंदेल, सांसद, भाजपा।
अनिवार्य मतदान कानून जनता पर तानाशाह फरमान थोपने के समान है। मतदान न करने पर सजा या जुर्माने का प्रावधान कतई उचित नहीं है। गुजरात सरकार के इस तुगलकी फरमान पर जल्द से जल्द रोक लगाए जाने की जरूरत है।- कप्तान सिंह राजपूत, चरखारी विधायक, सपा।
चुनाव में मतदान करना जनता का अधिकार है। इसके लिए किसी प्रकार की जोर जबरदस्ती नहीं की जानी चाहिए। ऐसे कानून बनाने के बजाय जनता को मतदान के प्रति प्रेरित करने के लिए बेहतर तरीके निकालने चाहिए।- सिद्धगोपाल साहू, पूर्व विधायक सपा।
वोट डालने में आनाकानी करना और बाद में योजनाओं का लाभ लेने के लिए आगे आ जाना उचित नहीं है। लोकतंत्र के पर्व में सभी को अपना योगदान देना चाहिए। गुजरात सरकार द्वारा बनाया गया कानून सराहनीय है। प्रदेश सरकार को भी यूपी में यह कानून लागू करना चाहिए।- पुष्पा अनुरागी, नगर पालिका चेयरमैन