महोबा। न्यायालय का समय सुबह 6:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक किए जाने की मांग को लेकर सोमवार को अधिवक्ता हड़ताल पर रहे और न्यायालय का कोई कामकाज नहीं किया। इससे दूरदराज से आए वादकारियाें को बैरंग लौटना पड़ा। हड़ताल से कचहरी परिसर में सन्नाटा पसरा रहा।
बुंदेलखंड की भीषण गर्मी को देखते हुए ब्रिटिश हुकूमत के समय से ही न्यायालय, कलेक्ट्रेट और तहसीलाें का समय एक मई से 30 जून तक सुबह 6:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक कर दिया जाता रहा है। दशकाें से न्यायालय का भी यही समय चलता रहा। इस साल न्यायालय का समय एक मई से 30 जून तक सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक कर दिए जाने के आदेश से अधिवक्ताआें ने नाराजगी जताते हुए समय पूर्ववत किए जाने की मांग की।
बैठक में अधिवक्ता समिति के अध्यक्ष अवध राजकमल नरसिंह राना ने कहा कि मई जून में भीषण गर्मी पड़ती है। इससे वकीलाें और वादकारियाें को लू व तेज धूप से बचाने के लिए न्यायालय का समय सुबह किया जाना चाहिए। महामंत्री प्रभात कुमार सुल्लेरे ने भी न्यायालय का समय पूर्ववत किए जाने की बात कही। बैठक में वरिष्ठ उपाध्यक्ष रविकांत त्रिपाठी, उपाध्यक्ष कुलदीप कुशवाहा, अजय सिंह सेंगर, मोहम्मद शाहिद सिद्दीकी, मुरारीलाल अग्रवाल, मूलचंद्र राजपूत, रवींद्र द्विवेदी, केशव शुक्ला, माधव सिंह, दुर्गा प्रसाद लोधी, तेजप्रताप पचौरी, कृष्णगोपाल द्विवेदी आदि अधिवक्ता मौजूद रहे।
मई में 50 डिग्री पहुंचता है पारा
बुंदेलखंड पठारी क्षेत्र होने के कारण यहां पर मई जून में तापमान 48 से 50 डिग्री सेल्सियस पहुंच जाता है। अधिवक्ता बरसाती और टीनशेड के नीचे पूरी दोपहर गुजारते हैं। इससे मई और जून में अधिवक्ताआें और वादकारियाें को प्रचंड गर्मी झेलनी पड़ती है। इसी कारण यहां पर गर्मियाें में कचहरी का समय सुबह कर दिया जाता था। इसके अलावा यहां पर बड़े जिलाें की तरह चैंबर नहीं हैं। अधिवक्ता टीन शेड, बरसाती और तिरपाल की झोपड़ियाें के नीचे काम करते हैं।