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कुपोषण से निपटने को जागरूकता अहम अस्त्र

Sat, 22 Feb 2014 05:30 AM IST
Mahoba
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चरखारी महोबा। पीढ़ी दर पीढ़ी चलने वाला कुपोषण का चक्र एक चुनौती है। कुपोषण से निपटने में जागरूकता अहम अस्त्र साबित हो सकता है। इसलिये चुनौती से निपटने को कुपोषण से बचाव और जागरूकता जरूरी है। विकास खंड चरखारी में पांच वर्ष के बच्चाें में 57 प्रतिशत बच्चे मध्यम एवं कम वजन की श्रेणी में हैं, जिसमें से लड़कियाें में स्तर 68.9 प्रतिशत है। यह जानकारी कृति शोध संस्थान के सचिव मनोज कुमार द्विवेदी ने दी।
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श्री द्विवेदी शुक्रवार को कृति शोध संस्थान के तत्वावधान में अधिवक्ता सभागार में आयोजित समुदाय आधारित कुपोषण प्रबंधन कार्यशाला में बोल रहे थे। उन्हाेंने कहा कि कम वजन के पाए गए बच्चाें में 57 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं, जिनकी माताआें की शादी 18 वर्ष से कम आयु में हो गई थी। वहीं 83 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं, जिनके तीन या उससे अधिक भाई- बहन हैं। कहा कि कुपोषण और एनीमिया की शिकार महिलाएं कम वजन वाले शिशु को जन्म देती हैं और यही शिशु आगे चलकर अल्प पोषित बच्चा बनता है।
डॉ. उमाशंकर तिवारी ने कहा कि कुपोषण के शिकार बच्चाें में बीमारी से लड़ने की ताकत कम हो जाती है। उन्हाेंने कहा कि इस प्रकार कुपोषण से बीमारी का चक्र बन जाता है और इस चक्र में फंसकर बच्चाें की मौत हो जाती है। इस दौरान नीलम द्विवेदी, प्रेमनारायण थापक और प्रीती श्रीवास्तव ने कुपोषण के बारे में जानकारी दी। इस मौके पर जय प्रकाश, विद्या देवी, पुष्पा देवी आदि मौजूद रहे।
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