महोबा। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कृपाशंकर शर्मा ने दहेज हत्या के मामले में सास ससुर को दस-दस साल की सजा सुनाई। पति के नाबालिग घोषित होने पर उसका मुकदमा किशोर न्यायालय महोबा में विचाराधीन है। दोनाें आरोपियाें को पुलिस हिरासत में जेल भेज दिया गया।
मध्य प्रदेश के जनपद छतरपुर के थाना लौड़ी के ग्राम अटवां निवासी कीरत प्रसाद ने अपनी बेटी आशा का विवाह थाना पनवाड़ी के ग्राम किल्हौवा निवासी कढ़ोरी रैकवार के बेटे अशोक रैकवार से छह साल पहले किया था। आशा के ससुराली शादी के बाद से कलर टीवी और मोटर साइकिल की मांग करने लगे थे। मांग पूरी न होने पर उसे प्रताड़ित किया जाता था। 1 अगस्त 2007 को आशा के ससुराल वालों ने उसे जलाकर मार डाला। मृतका के पिता कढ़ोरीलाल रिपोर्ट दर्ज कराने थाना महोबकंठ पहुंचा तो पुलिस ने रिपोर्ट लिखने के बजाए भगा दिया। इलाहाबाद जोन के आईजी के आदेश के बाद थाना महोबकंठ में 7 अगस्त 2007 को रिपोर्ट दर्ज की गई थी। गुरुवार को कोर्ट ने दोनाें पक्षाें के गवाह और बहस सुनने के बाद सास कलावती और ससुर कढ़ोरी रैकवार को दहेज हत्या का दोषी ठहराते हुए दस-दस साल की सजा और दस-दस हजार रुपए का जुर्माना ठाेंका। जुर्माना अदा न करने पर तीन-तीन माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी। मुकदमे की पैरवी सरकार पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता बाबूलाल यादव ने की।