बरा मौजे में एक किसान की जमीन पर वन विभाग ने पौधरोपण करा दिया। इससे आहत किसान की सदमे से मौत हो गई।
एसडीएम के निर्देश तहसीलदार के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल की। जांच में विवादित भूमि किसान के नाम दर्ज पाई गई।
बरा गांव निवासी श्यामलाल (40) पुत्र परमलाल के पास पंाच बीघा जमीन है। खसरा खतौनी में भी किसान का नाम दर्ज है। इस जमीन पर कुछ माह पहले वन विभाग ने पौधरोपण करा दिया था।
श्यामलाल ने इसकी शिकायत कई बार अधिकारियों से की, लेकिन समस्या का कोई निदान नहीं निकला। एक माह पहले तहसील परिसर में अनशन पर बैठ गया था। इसके बाद भी उसे न्याय नहीं मिला।
किसान के नाम उक्त भूमि दर्ज होने के कारण उसे सूखा राहत का पैसा भी मिला था। कब्जा कर लिए जाने से आहत किसान गुरुवार को खेत की तरफ गया था।
जहां पर वह अपने जमीन पर वन विभाग के पौधे देखकर बेहोश हो गया, जिससे उसकी मौत हो गई। प्रभागीय वनाधिकारी महोबा ईश्वरदयाल का कहना है कि उक्त जमीन आरक्षित वन क्षेत्र की है।
1995 में वन क्षेत्र की जमीन पर राजस्व विभाग ने 75 लोगों के पट्टे कर दिए थे। जिस पर वन विभाग ने जिलाधिकारी की अदालत में मुकदमा दायर किया था।
तत्कालीन जिलाधिकारी ने 74 पट्टे निरस्त कर दिए थे। निरस्तीकरण के दौरान श्यामलाल का पट्टा निरस्तीकरण होने से छूट गया था।
छूटे पट्टाधारक के विरुद्ध वन विभाग ने पुन: जिलाधिकारी के यहां श्यामलाल का पट्टा निरस्त किए जाने के लिए वाद दायर किया था जो विचाराधीन है, लेकिन पहले से उक्त भूमि वन क्षेत्र की आरक्षित होने के कारण उसमें पौधरोपण कराया गया है।
जमीन पर कब्जा करने से आहत किसान की सदमे से मौत
1995 में पट्टे में मिली थी पांच बीघा जमीन
किसान का खसरा खतौनी में आज भी दर्ज है नाम