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35 साल पुराने हथकरधा कारखाने को लगी जंग

Mon, 15 Oct 2018 10:40 PM IST
महोबा।
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जीर्णशीर्ण पड़ी हथकरघा की इमारत - फोटो : amarujala
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महोबा। गांधी जी के सपने को साकार करने के लिए जिला मुख्यालय में खोला गया हथकरघा उद्योग शासन-प्रशासन की उपेक्षा और श्रमिकों को प्रोत्साहन न मिलने से हथकरघा बंद हो गया है। यहां पर लगी मशीनें और चरखे जंग खाकर टूट गए हैं। इमारत भी देख-रेख के अभाव में जीर्ण-शीर्ण हालात में पहुंच गई हैं। हरकरघा के बंद होने से करीब एक सैकड़ा कारीगर बेकार हो गए हैं।

पैंतीस साल पहले पूल्ड हाउस कॉलोनी के पास हथकरघा खोला गया था। जहां पर करीब एक सैकड़ा कारीगर हाथ के चरखे और छोटी-छोटी मशीनों से कपड़ा तैयार करते थे। हथकरघा से करीब एक सैकड़ा लोगों को रोजगार मिला हुआ था लेकिन दो दशक पहले शासन द्वारा हथकरघा के कारीगरों का कई माह तक वेतन न मिलने और कच्चे माल के लिए बजट की व्यवस्था न किए जाने से धीरे-धीरे हथकरघा उद्योग बंद हो गया है। बेलाताल व अन्य स्थानों से आने वाले कारीगर भी अपना-अपना सामान लेकर घर चले गए।
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बीस साल से बंद पड़े इस लघु उद्योग को चालू कराने के लिए लोगों द्वारा काफी प्रयास किया गया लेकिन अधिकारियों ने कोई सुध नहीं ली, जिससे यहां के लोगों का रोजगार छिन गया। इस कारोबार से जुड़े लोग अब दूसरा काम करने को मजबूर हैैं। हथकरघा की इमारत भी इतनी जर्जर हो गई कि कभी भी धराशायी हो सकती है। हथकरघा में रखी मशीनें भी देख-रेख के अभाव में जंग खा गई है। कई मशीनें और चरखे टूटकर बर्बाद हो गए हैं।

सरकारी कपड़े की दुकान में नहीं मिलता कपड़ा
हथकरघा के बंद हो जाने से गरीब वर्ग के लोगों को मिलने वाला फायदा भी बंद हो गया है। जिससे अब उन्हें खुले बाजार में महंगे दामों पर वस्त्र खरीदने पड़ रहे हैं। पहले हथकरघा से बने कपड़े गरीब वर्ग के लोगों को सरकारी दुकानों में सस्ती कीमत पर मिलते थे लेकिन अब खादी ग्रामोद्योग से माल तैयार न होने के बाद सरकारी कपड़े की दुकानें भी बंद हो गई है।
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हथकरघा बंद होते ही चरखों पर लगा ग्रहण
शहर में हथकरघा के बंद होने के साथ ही भटीपुरा के कुरियानापुरा और काजीपुरा कुरियाना में चलने वाले चरखे भी ठप हो गए। इस काम में जुड़े तमाम कारीगर अब दूसरा काम नहीं सीख सके। जिससे उनका परिवार आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा है। वहीं कुछ कारीगर परलोक सिधार रहे हैं। कुल मिलाकर मोहल्लों-मोहल्लों में चलने वाले चरखे पूरी तरह से बंद हो गए हैं।
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