जिले में नगर क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों का बुरा हाल है। हालात ये है कि 54 विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था 19 टीचरों के भरोसे हैं। कई विद्यालयों में तो टीचर तक नहीं हैं। यहां एक टीचर दो विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था देख रहा है। इससे शिक्षण कार्य में गुणवत्ता नहीं आ पा रही है।
महोबा नगर में छह जूनियर और 12 प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं। इसी तरह नगर क्षेत्र चरखारी में 14 जूनियर और 22 प्राथमिक विद्यालय हैं। इन 54 विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था महज 19 टीचरों के भरोसे है। जिससे प्राइमरी शिक्षा पटरी पर नहीं आ पा रही है।
नगर क्षेत्र के सभी विद्यालयों की बेहतरीन इमारत तैयार हैं। हर साल हजारों रुपये विद्यालय की रंगाई पुताई और साज सज्जा के लिए आती है। लेकिन टीचरों की कमी इन सब पर भारी पड़ रही है। जिससे इन विद्यालयों में पढ़ने वाले गरीब वर्ग के बच्चों का भविष्य अंधकार में है।
नगर क्षेत्र के विद्यालयों में मात्र दो प्रधानाध्यापक और 17 सहायक अध्यापक तैनात हैं। ऐसी स्थिति में एक परिसर में बने जूनियर और प्राथमिक विद्यालय का शिक्षण कार्य एक टीचर देख रहा है। छुट्टी जाने पर एकल विद्यालयों में ताले लटक जाते हैं। बीएसए के लाख प्रयास के बाद भी नगर क्षेत्रों के विद्यालयों में टीचरों की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। यही वजह है कि शिक्षण कार्य में गुणवत्ता नहीं आ रही है।
100 से 150 बच्चों को पढ़ा रहा एक टीचर
नगर क्षेत्र के स्कूलों में एक-एक टीचर 100 से 150 बच्चों का शिक्षण कार्य देख रहा है। जिससे बच्चों के शोर शराबा और अकेले शिक्षण कार्य कराने व काम देने से टीचरों पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। यही वजह है कि ग्रामीण अंचलों से नगर क्षेत्र में आए टीचर अब सिर पकड़ रहे है। स्थिति यह है कि पलभर के लिए यहां के टीचरों को फुरसत नहीं मिलती है।
तीन दशक से नहीं हुई नगर क्षेत्र में नियुक्ति
नगर क्षेत्र के विद्यालयों में तीन दशक से टीचरों की नियुक्ति नहीं हुई है। जबकि हर साल टीचरों के सेवानिवृत्त होने से नगर क्षेत्र के विद्यालय में 20 फीसदी भी टीचर नहीं रह गए है। चार साल पहले कुछ परिषदीय विद्यालयों में टीचर भेजकर व्यवस्था में सुधार किया गया था। लेकिन इसके बाद भी टीचरों की भारी कमी है। इससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है।
नगर क्षेत्र के विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए बीएसए चाह कर भी टीचरों की नियुक्ति नहीं कर पा रहे हैं। कारण, नगर क्षेत्र की रिक्तियां न निकलने के कारण इस विद्यालयों में नए टीचरों की नियुक्ति नहीं हो पा रही है। शासन स्तर पर भी नगर के विद्यालयों में टीचरों की नियुक्ति के लिए लिखा पढ़ी की गई है। साथ ही बैठक में भी इस बात को रखा गया था।
- रामेश्वर प्रसाद, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, महोबा।