कीरत सागर में दूसरे प्रवेश द्रार का निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ
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महोबा। ऐतिहासिक कीरत सागर का दूसरा प्रवेश द्वार अपने आप में अनूठा होगा। यह करीब साढ़े 16 फीट ऊंचा होगा। द्वार में राजस्थानी पत्थर (मार्बल) पर अदभुत नक्काशी भी देखने को मिलेगी। इसके लिए राजस्थान से कारीगरों को बुलाया गया है। कारीगर 15 दिनों में गेट का काम पूरा कर लेंगे।
डीएम सत्येंद्र कुमार के निर्देश पर निर्माण का कार्य जोर पकड़ रहा है। कीरत सागर के तट पर युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की आपस में बैठकर तैयारी करते हैं। इस बात को ध्यान में रखकर डीएम ने कीरत सागर तट पर वाईफाई, लाइब्रेरी, शौचालय, आरओ प्लांट की व्यवस्था कराने को कहा है। साथ ही इसे खूबसूरती देने के लिए सेल्फी प्वाइंट, रंगबिरंगी लाइटों से भी संवारा जाएगा। ओपन थियेटर और मंच भी बनेगा। डीएम ने इस कार्य के लिए खनन निधि धन आवंटित किया है। साथ ही पर्यटन विभाग ने भी तीन करोड़ रुपये की धनराशि जारी की है। यदि सब कुछ ठीक ठाक रहा, तो एक जनवरी से कीरत सागर की तस्वीर काफी हद तक बदली नजर आएगी।
यह है इतिहास कीरत सागर का निर्माण चंदेल वंश के राजा कीर्ति वर्मन ने 1060 से 1100 ईसवीं के मध्य कराया था। लगभग दो किलोमीटर क्षेत्र में यह तालाब फैला है। इसी स्थान के निकट 1182 में दिल्ली नरेश पृथ्वीराज चौहान व स्थानीय चंदेल राजा परमाल के मध्य ऐतिहासिक युद्ध हुआ था। इस ऐतिहासिक युद्ध की स्मृति में यहां कजरी उत्सव मनाया जाता है।
द्रार का प्रस्तावित डिजाइन- फोटो : MAHOBA