अमर उजाला ब्यूरो
चरखारी (महोबा)। गोवर्धननाथ मंदिर की भूमि और ओल्ड पैलेस को लेकर मामला तूल पकड़ता जा रहा है। दोनों पक्ष एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। चरखारी रियासत के युवराज जयराज सिंह ने कहा कि ड्योढ़ी दरवाजा पुरातत्व विभाग की संपत्ति है। उस पर पूर्व सांसद अवैध कब्जा किए हैं जबकि पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत ने ओल्ड पैलेस का रजिस्टर्ड बैनामा कराने का दावा किया है। साथ ही कहा कि पिछड़ी जाति का होने के कारण राजवंश के सामंतशाही उनका विरोध कर रहे हैं।
पूर्व सांसद ने कहा कि चरखारी रियासत 12वीं शताब्दी तक लोधी राजा के आधिपत्य में रही है। हमारे पूर्वज वंशिया शाह, मंडना शाह चरखारी रियासत के शासक रहे हैं, जिनके शासन में बने मंडना तालाब और वशिंया तालाब इसके सबूत है। उन्होंने बताया कि पहले सत्ता बल पर मिलती थी। कहा कि उन्होंने पुराना राजमहल खरीदकर अपने पूर्वजों की विरासत वापस प्राप्त की है लेकिन राजमहल के सामंतशाही विचारधारा के लोग इसका विरोध कर रहे हैं।
पूर्व सांसद का कहना है कि चरखारी रियासत के राजा स्व. जयंत सिंह जूदेव के कहने पर उन्होंने उनके दोनों बेटों का करीब 25 लाख रुपये एजूकेशन लोन चुकाया था। उसी के एवज में महारानी उर्मिला सिंह ने पुराने राजमहल की रजिस्ट्री की है। उनका कहना है कि 75 प्रतिशत महल का हिस्सा व कृषि फार्म हाउस कम दामों में दूसरे लोगों ने भी खरीदा है। कई लोगों ने मंदिर की जमीन में मकान बना लिए हैं। इसकी भी जांच कराई जाए।
-गोवर्धननाथ मंदिर की जमीन और ओल्ड पैलेस के मामले ने तूल पकड़ा