श्रीनगर महोबा। तेज धूप और सूखे के चलते ग्राम ढिकवाहा में जलस्तर नीचे खिसक जाने से हैंडपंपों ने काम करना बंद कर दिया है। दो दो घंटे इंतजार के बाद दो बाल्टी पानी मिल रहा है। 21 हैंडपंपों में से 20 का यहीं हाल है। सिर्फ एक हैंडपंप पर्याप्त पानी दे रहा है। जिससे गांव में पानी को लेकर हायतौबा मच गई है। पिछले साल गांव में टैंकरों से कराई गई पानी की आपूर्ति का भुगतान न होने से ग्राम प्रधान ने इस साल पानी के टैंकर चलवाने के नाम पर हाथ खड़े कर लिए है।
विकासखंड कबरई के ग्राम ढिकवाहा में 2200 की आबादी है। यहां पर 1100 मतदाता है। गांव में पेयजल आपूर्ति का मात्र एक स्त्रोत हैंडपंप है लेकिन इस साल सूखे के चलते जलस्तर काफी नीचे खिसक जाने से हैंडपंप दो दो घंटे इंतजार के बाद दो बाल्टी पानी दे रहे है। गांव में बढ़ते पानी के संकट को देखते हुए डीएम ने भरपूर पानी दे रहे हैंडपंप में सबमर्सिबल पंप लगवाकर हैंडपंप के पास ऊंचाई में एक सिंटेक्स की टंकी रखवाकर उसमें टोटियां लगवा दी थी, लेकिन कुछ दिन पहले आई आंधी में सिंटेक्स टंकी उड़कर टूट गई, जिससे पानी का संकट बढ़ गया। अब लोग घंटों हैंडपंपों में पानी आने का इंतजार करते है।
माह अप्रैल में तेज भीषण गर्मी के साथ ही हैंडपंपों का जलस्तर नीचे खिसकना शुरू हो गया था। अब धीरे धीरे हैंडपंपों ने काम करना बंद कर दिया है। बमुश्किल थोड़ा बहुत ही पानी मिल रहा है। पानी न मिलने से ग्रामीण एक एक किमी दूर गांव के बाहर लगे हैंडपंपों से पानी लाने को मजबूर है। गांव में हैंडपंपों और कुओं के अलावा पेयजल के और कोई साधन नहीं है। भीषण गर्मी में कुओं ने भी जवाब दे दिया है। ग्राम प्रधान श्रीपत यादव का कहना है कि पिछले साल सूखे के संकट में टैंकरों से गांव में पानी की आपूर्ति कराई थी। जिसका भुगतान न किए जाने के कारण इस साल टैंकर नहीं लगाया गया।
इंसेट
रात में जागकर ग्रामीण भर रहे पानी
भीषण गर्मी में पानी की समस्या से जूझ रहे ग्रामीण अब हैंडपंपों में रात में पानी आ जाने के कारण दिन के बजाय रात में जागकर पानी भर रहे हैं। हालत यह है कि रात में भी दिन जैसी चहल पहल रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि दिन में हैंडपंपों में भारी भीड़ के कारण घंटों इंतजार के बाद पानी नहीं मिल रहा। जिससे वह रातों को जागकर पानी भर रहे हैं।
हैंडपंपों ने दिया जवाब, पानी को लेकर मचा हाहाकार
-सूखे के चलते जलस्तर नीचे पहुंचने से हैंडपंप हुए ड्राई
-पिछला भुगतान न होने पर प्रधान ने टैंकर चलाने से किया इनकार