जिले के बालू बाहुल क्षेत्र छतेसर, स्योड़ी आदि 17 बालू घाटों को जिला प्रशासन ने ई-टेंडरिंग के लिए चिंहित किया है। शासन के निर्देश पर बालू खदानों में परमिट देने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। मई के पहले सप्ताह हाई कोर्ट से हरी झंडी मिलते ही ई-टेंडरिंग का नोटीफिकेशन कर दिया जाएगा।
महोबा जिले में छतेसर, बर्मा, धसान नदी में बहुतायत मात्रा में बालू पाई जाती है। इसका उपयोग उसी क्षेत्र के ग्रामीण एवं अन्य विभाग चोरी छिपे निर्माण कार्यों के लिए करते रहे है। केन एवं बेतवा की तरह उच्च गुणवत्ता की बालू इन घाटों में न होने के कारण विभागों ने निर्माण कार्यों के लिए इसे मान्यता नहीं दी थी।
इसके चलते जिले में जब इन घाटों के खनन पट्टों के लिए आवेदन मांगे गए तो लोगों ने रुचि नहीं दिखाई। केन बेतवा की तरह बालू घाटों का वार्षिक किराया अधिक होने तथा सरकार कोे दिए जाने वाले राजस्व के मुकाबले मुनाफा न होने से पिछले 10 साल से बालू खनन के वैध पट्टे नहीं हो सके।
जिलाधिकारी अजय कुमार सिंह के निर्देश पर जिले की छतेसर, बर्मा, धसान नदियों को मिलाकर खनिज विभाग ने 17 बालू खनन क्षेत्रों को चिंहित किया है। जहां छह-छह माह के परमिट दिए जाएंगे। इन क्षेत्रों के सर्वे के लिए जिलाधिकारी के निर्देश पर डीएफओ, एडीएम, एसडीएम, खान अधिकारी आदि की संयुक्त जांच समिति बनाई गई है।
खनन बाहुल्य क्षेत्रों में बालू की उपलब्धता और उसकी क्वालिटी की जांच तैयार कर रिपोर्ट जिलाधिकारी को देंगे। ताकि उन क्षेत्रों का वार्षिक ई-टेंडरिंग मूल्य निर्धारित किया जा सके। तभी यहां ई-टेंडरिंग की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।
प्रदेश के मौरंग बाहुल विभिन्न जिलों में पिछले पांच सालों में हुए अवैध खनन को लेकर उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने 28 जुलाई 2016 को सभी प्रकार के खनन पट्टे रोक दिए थे। साथ ही नए पट्टे न करने के निर्देश राज्य सरकार को दिए थे।
उच्च न्यायालय ने सरकार बदलते ही अवैध खनन पूरी तरह बंद होने के कारण ई-टेंडरिंग से छह-छह माह के परमिट पर बालू खनन कराने की पालिसी दो मई को कोर्ट में पेश करने को कहा है। कोर्ट के आदेश के बाद ही ई-टेंडरिंग की प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी। जिसके चलते ई-टेंडरिंग नोटिफिकेशन अभी एक सप्ताह का वक्त लग जाएगा।
मौरंग के खनन परमिट पारदर्शिता के साथ देने के लिए शासन ने यूपी इलेक्ट्रानिक्स कारपोरेशन को अन्य विभागों की ई-टेंडरिंग प्रक्रिया के भांति इस विभाग की ई-टेंडरिंग प्रक्रिया के साफ्ट वेयर डेवलप करने के निर्देश दिए है। संबंधित आवेदक को विभाग में ई-टेंडरिंग के लिए अपना पंजीकरण कराकर पासवार्ड आदि लेना होगा।
इसके आधार पर खनिज विभाग की वेबसाइट में रिक्त मौरंग खनन क्षेत्र में अपनी पसंद के घाट लेने के लिए ई-टेंडरिंग की दरें डाली जा सकेंगी।