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Maharajganj News: महिलाओं ने माइक्रो फाइनेंस कंपनी से लिया कर्ज, परिजनों का बढ़ रहा तनाव

Tue, 27 May 2025 01:05 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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महराजगंज। माइक्रो फाइनेंस कंपनी से कर्ज लेने के बाद तनाव बढ़ जा रहा है। बीते दिन एक महिला के घर वृद्ध ने जान दे दी। जिले में इसी तरह से कर्ज लेने वाली महिलाओं के घर के लोग तनाव में हैं।
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कंपनी के एजेंट घर पर आकर किस्त जमा करने के लिए दबाव बनाते हैं। मामला पुलिस तक नहीं पहुंचने के कारण कोई कार्रवाई भी नहीं होती है। पनियरा क्षेत्र के गोनहां गांव के किसान सूर्यनाथ ने बीते दिनों आत्महत्या कर ली। उन्होंने केसीसी का ऋण लिया था। उसे किसी तरह से जमा कर रहे थे।
उनकी बड़ी बहू रुक्मिणी ने माइक्रो फाइनेंस कंपनी से करीब 65 हजार रुपये कर्ज लिया। उनके घर वसूली करने वाले एजेंट बार-बार जाते थे। आरोप है कि इससे सूर्यनाथ तनाव में आ गए। उनको लगा की पहले से केसीसी का कर्ज और बहू की ओर से लिया गया कर्ज समस्या बन रहा है। घर की माली हालत ठीक नहीं होने से कर्ज जमा करने में समस्या हो रही थी।
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इसे लेकर वह हमेशा परेशान रहते थे। मृतक की बड़ी बहू रुक्मिणी ने बताया की कर्ज की रकम ससुर के इलाज में खर्च हो गई। इलाज में अधिक रकम की जरूरत पड़ी तो माइक्रो फाइनेंस कंपनी से कर्ज लेकर काम चलाना पड़ा। इस ऋण पर लगने वाला ब्याज भी बहुत अधिक है। इससे स्थिति और बिगड़ती चली गई।
रुक्मिणी ने बताया कि ऋण की अदायगी को लेकर उनके ससुर हमेशा तनाव में रहते थे। विशेषकर जब समूह के एजेंट वसूली के लिए घर आते थे। तब वे बहुत घबरा जाते थे। उनकी हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही थी, लेकिन परिवार के पास कोई विकल्प नहीं था।
इस आर्थिक तंगी और लगातार बढ़ते कर्ज के बोझ ने अंततः उन्हें आत्महत्या जैसे कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया। इस मामले में थाने में कोई तहरीर नहीं दी गई है। मृतक के परिजन कोई कार्रवाई भी नहीं चाह रहे हैं।
सरकारी सहायता का दिलाया भरोसा
तहसीलदार सदर पंकज शाही मृत किसान के घर गोनहां पहुंचे। उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाया और सरकारी सहायता का भरोसा दिलाया। उन्होंने आश्वासन दिया कि मृतक की पत्नी बुधनी देवी को विधवा पेंशन और पारिवारिक लाभ योजना के तहत सहायता दी जाएगी। इसके अलावा अन्य जरूरी सुविधाएं जैसे आवास, खाद्यान्न कार्ड आदि के लिए रिपोर्ट बनाकर उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी।

24 डिस्मिल जमीन औने-पौने दाम में बेचकर किस्त किया जमा
बैदा गांव के इंद्रभान ने बताया कि उनकी भाभी ने माइक्रो फाइनेंस कंपनी से तीन किश्तों में 1.60 लाख रुपये समूह के माध्यम से कर्ज लिया था। किश्तों पर लगने वाला ब्याज अत्यधिक होने के कारण कर्ज चुकाना मुश्किल हो गया। कंपनी के एजेंट आए दिन घर आकर गाली-गलौज करते थे। आर्थिक तंगी के कारण परिवार को अपनी 24 डिस्मिल जमीन औने-पौने दाम में बेचकर 60 हजार रुपये लौटाने पड़े। फिर भी ब्याज की रकम खत्म नहीं हुई। इस मानसिक दबाव और एजेंटों की धमकियों से परेशान होकर उनकी भाभी अपने पति के साथ दिल्ली चली गईं।
एजेंटाें के डर से मायके चली गई महिला
रतनपुरवा गांव की रिंकू ने भी माइक्रो फाइनेंस कंपनी समेत अन्य संस्थाओं से करीब पांच लाख रुपये का कर्ज लिया था। आरोप है कि एजेंटों को जब भी मौका मिलता, वे उसके घर पहुंचकर गाली-गलौज और मानसिक उत्पीड़न करते हैं। इससे घबराकर रिंकू अपने मायके बैदा पोखरहवा टोला चली गई, लेकिन एजेंट वहां भी पहुंच गए और प्रताड़ित करने लगे। इसी प्रकार, लाला गांव के रामनयन ने अपने बीमार भाई धर्मराज के इलाज के लिए तीन किश्तों में 45-45 हजार रुपये का कर्ज लिया था, जो उनकी मां सुभावती और पत्नी सुमन के नाम से था। ब्याज दर इतनी अधिक थी कि यह रकम बढ़कर करीब चार लाख रुपये हो गई। कर्ज चुकाने के लिए रामनयन को अपनी 18 डिस्मिल जमीन बेचनी पड़ी, बावजूद इसके कर्ज खत्म नहीं हुआ। रामनयन का आरोप है कि कंपनी के एजेंट उसकी पत्नी को आए दिन धमकाते हैं, गाली-गलौज करते हैं।
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