महिलाएं खुद को कमजोर न समझें :अमरनाथ
फरेंदा ब्लॉक सभागार में नारी सशक्तिकरण गोष्ठी का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। कानून में महिलाओं के पास उतने ही अधिकार हैं, जितने पुरुष के पास हैं। महिलाएं अपने आप को कमजोर न समझें। वे अपने अधिकारियों को पहचानें और उद्देश्यों को पूरा करें। ये बातें बुधवार दोपहर फरेंदा ब्लॉक सभागार में आयोजित नारी सशक्तिकरण गोष्ठी में फरेंदा के बीडीओ अमरनाथ पांडेय ने कहीं।
अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से अपराजिता मुहिम के तहत बुधवार दोपहर 12 बजे फरेंदा ब्लॉक सभागार में नारी सशक्तीकरण गोष्ठी का आयोजन हुआ। इसमें महिलाओं को अधिकारों की जानकारी दी गई। महिलाओं ने शपथ ली कि वह अपने आसपास की महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करेंगी।
मुख्य अतिथि बीडीओ फरेंदा अमरनाथ पांडेय ने कहा कि महिलाएं अपने कार्यों और संस्कारों के जरिए परिवार को खुशहाल रखने और बुलंदी की ओर ले जाने के लिए तत्पर रहती है। नारी को शिक्षा, सुपोषण, बेहतर स्वास्थ्य के जरिए आगे बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने महिला हेल्पलाइन, घरेलू हिंसा आदि के संबंध में विस्तार से बताया।
विशिष्ट अतिथि सीडीपीओ बृजेन्द्र जायसवाल ने कहा कि महिलाओं को संवैधानिक रूप से तमाम अधिकार प्राप्त हैं, लेकिन सामाजिक रूप से सबल बनना बाकी है। इसके लिए महिलाओं को खुद प्रयास करना होगा।
वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. मनीष चौबे ने कहा कि घरेलू हिंसा से बचाने के लिए महिला हेल्पलाइन 181 जारी करके उनकी सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। इसलिए महिलाएं डरें नहीं, समस्याओं पर खुलकर बात करें तो अपराजिता बनेंगी। सुपरवाइजर प्रमिला यादव, ममता राय, सरिता चौरसिया, अंजनी देवी, ललिता पांडेय ने महिला सशक्तिकरण पर गीत प्रस्तुत करने के साथ ही महिला अधिकारी पर चर्चा की। कार्यक्रम 35 लोगों ने प्रतिभाग किया। इस दौरान इसरावती सिंह, पतासी देवी, पार्वती रजत, सुधा, रीना मिश्रा, लक्ष्मी, शशिकला, आरती, संगीता आदि मौजूद रहे।
अधिकारों के प्रति जागरूक होने की जरूरत
कार्यक्रम में शामिल ममता राय, अराधना, प्रमिला यादव, सरिता चौधरी ने बताया कि महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार नहीं मिल सके हैं। आए दिन दहेज हत्या, महिला उत्पीड़न और दुष्कर्म के मामले सामने आना इसका उदाहरण है। नारियों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने की जरूरत है। महिला सशक्तिकरण एक अहम मुद्दा है। पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं को बराबरी का हक नहीं मिल पा रहा है। किसी की काबिलियत का अंदाजा उसके जेंडर से नहीं, प्रतिभा से होती है।