फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कबीरपंथी होने का हवाला: घर के बाहर पत्नी को दफना दिया, बोला- हम कबीरपंथी हैं, यहीं दफनाते हैं, हंगामा

Wed, 16 Sep 2026 01:45 PM IST
Rohit Singh संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज

सार

सोनौली कोतवाली क्षेत्र के हरदी डाली गांव में एक व्यक्ति ने पत्नी की मौत के बाद उसका शव घर के बाहर ही दफना दिया। ग्रामीणों ने इसका विरोध जताया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले के निस्तारण में जुटी है।
विज्ञापन
घर के बाहर ही पत्नी को दफना दिया - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सोनौली कोतवाली क्षेत्र के हरदी डाली गांव के चौराहे के पास एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी की मौत के बाद उसका शव घर के बाहर ही दफना दिया। घर के बाहर शव दफनाए जाने का ग्रामीणों ने विरोध जताया। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस मामले के निस्तारण में जुटी रही। वहीं, मृतका के पति ने कबीर पंथ का अनुयायी होने का हवाला देते हुए लाश को वही पर दफनाने की जिद पर अड़ा हुआ है।

विज्ञापन

जानकारी के मुताबिक, सोनौली कोतवाली क्षेत्र के हरदीडाली चौराहे पर नेपाल से कुछ वर्ष पूर्व आकर मकान बनाकर प्यारे ज्ञान दास रह रहे हैं। उनके अनुसार, वे करीब छह साल से रहते हैं। उनका इसका जन्म हिंदू धर्म के विश्वकर्मा समाज में हुआ, लेकिन कुछ वर्ष पहले उन्होंने कबीर पंथ समाज अपना लिया और उनके अनुसार चलने लगे।

इसके साथ इसकी पत्नी कलावती व बच्चे साथ ही रहते थे। मंगलवार को दोपहर इसकी पत्नी कलावती(50) की अचानक तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई। मौत के बाद प्यारे ज्ञान दास जब मृतक पत्नी का शव अपने घर के बाहर दफनाने लगा तभी कुछ लोगों ने आपत्ति जताई और ग्राम प्रधान गोपाल नारायण चौधरी को सूचना दी।

मौके पर ग्राम प्रधान भी पहुंचे और प्यारे ज्ञान दास को समझाने का प्रयास किया कि वह अपनी पत्नी का शव को कहीं दूसरी जगह दफना दे। लेकिन, वह अपने जिद पर अड़ा रहा कि कबीर पंथ के अनुसार शव को अपने घर पर ही दफनाते हैं। फिर ग्राम प्रधान ने स्थानीय पुलिस को सूचना दी और मौके पर पुलिस पहुंची और समझाने बुझाने का प्रयास किया, लेकिन प्यारे ज्ञान दास नहीं माना।

ग्रामीणों के विरोध के बाद पति ने इसे अपने धर्म की मान्यता बताया। हरदीडाली के पूर्व ग्राम प्रधान कृष्ण कुमार ने बताया कि घर के बाहर शव को दफनाने से लोग भयभीत हैं। शव को दफनाने के लिए नदी के किनारे होना चाहिए था ना की घर के अंदर या बाहर।

गांव के सुनील, दिनेश पासवान, श्रीकिशुन, अनिल, दयाशंकर ने बताया कि शव को घर के पास नही दफनाना चाहिए था। इससे तमाम प्रकार की दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। जबकि मृतका केपति प्यारे ज्ञान दास ने बताया कि हम कबीर पंथ समाज में चले गए हैं और मेरी पत्नी भी चली गई थी।
विज्ञापन

हम लोग संत समाज के रिति रिवाज के अनुसार शव को दफनाए हैं। कहीं से किसी प्रकार का कानून का उल्लघन नहीं किए हैं। यह जमीन हमारी खरीदी गई जमीन है। इस पर हम शव को दफना सकते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें