महराजगंज। जलवायु परिवर्तन के दौर ने मौसम विभाग की सटीकता पर सवाल खड़े किए हैं। मानसून इस बार 28 जून तक भी सक्रिय न होने के कारण किसान अब नर्सरी बचाने के लिए पंपिंग सेट से रोपाई को मजबूर हो गए हैं। पूर्व के वर्षों में जून के शुरुआती सप्ताह में रोपाई कार्य शुरू करने वाले जिले में महीने के आखिर तक अभी 40 फीसदी रोपाई शेष बची है।
पिछले चार दिनों से तराई का मौसम लोगों की दुश्वारी बढ़ा रहा है। दिन में जहां तल्ख धूप के चलते झुलसाती गर्मी पसीना निकाल रही तो रात में उमस भरी गर्मी नींद खराब किए हुए है। रविवार को अन्य दिनों के मुकाबले धूप कुछ अधिक तेज महसूस हुई। अधिकतम तापमान तो 36 डिग्री रिकॉर्ड किया गया, लेकिन गर्मी 40 डिग्री सेल्सियस की महसूस हुई। दिन डूबने के बाद उमस भरी गर्मी का दौर देर रात तक बना रहा और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री रिकॉर्ड किया गया।
1.45 लाख हेक्टेयर है धान का रकबा
जनपद में धान का रकबा इस बार 1.45 लाख हेक्टेयर का है, लेकिन अभीतक रोपाई पूरी नहीं हो सकी है। यहां के किसान आसपास के अन्य जनपदों की अपेक्षा धान की रोपाई पहले करते रहे हैं। पास पड़ोस के जनपदों में धान की रोपाई जहां जुलाई में शुरू होती वहीं जनपद में यह जून के पहले सप्ताह से ही शुरू होती रही है। लेकिन, इस बार रोपाई की शुरुआत उन्हीं क्षेत्रों में इस समय सीमा के भीतर हुई जहां नहर व ट्यूवेल की सहुलियत उपलब्ध। जहां नहर या ट्यूबवेल की सुविधा नहीं है वहां के किसान अभी मानसून का इंतजार में थे, लेकिन इस बार मानसून की लेटलतीफी के चलते अभी 40 फीसदी रोपाई अवशेष पड़ी है। भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष रामअशीष ने कहा कि जहां नहर की सुविधा नहीं वहां के किसान पंपिंग सेट से रोपाई हर हाल में जून के पहले पखवाड़े में पूरी कर लेते थे जिससे मानसून आने से पहले रोपाई खत्म हो जाती थी, लेकिन इस बार रोपाई शुरू होते ही डीजल महंगा कर दिया गया जिसके कारण अबतक रोपाई लगभग 35 से 40 फीसदी तक शेष है। जिनकी नर्सरी बड़ी हो रही वह मजबूरी में महंगा डीजल खरीदकर रोपाई कर रहे।
मानसूनी गतिविधि सक्रियता के साथ आगे बढ़ रही है। एक दो दिन में इसके दस्तक देने की उम्मीद है। मानसून आने के बाद किसानों को काफी राहत मिलेगी।
अतुल कुमार सिंह, प्रभारी आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र।