ठोकर नंबर एक पर जगह-जगह रेनकट और बड़े-बड़े गड्ढे
राजस्व टीम की गाड़ी फंसी सिंचाई विभाग के इंतजाम पर उठे सवाल
निचलौल। नारायणी नदी के तटवर्ती गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए सिंचाई विभाग की ओर से भेड़िहारी के पास लाखों रुपये की लागत से बनाया गया बांध और कराए गए बांध की मरम्मत की पोल लगातार हो रही बारिश ने खोल दी है। नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ बांध के दोनों तरफ पानी पहुंच गया है। जगह-जगह रेनकट और बड़े-बड़े गड्ढे होने से बांध की हालत बेहद जर्जर हो गई है। इससे भेड़िहारी, बढ़ेया, डोमा, चरभरिया, कलनही, चन्दा गुलभार सहित दर्जनों गांवों समेत आसपास के संभावित प्रभावित गांवों के ग्रामीणों में बांध टूटने की आशंका को लेकर चिंता बढ़ गई है।
ग्रामीण अजय राजभर के अनुसार, कुछ दिन पहले ही सिंचाई विभाग ने बांध को मजबूत और सुरक्षित होने का दावा किया था। हालांकि, लगातार तीन दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश के बाद स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। डबलू निवासी डोमा ने बताया कि बाढ़ के पानी और बारिश के पानी से बांध का बड़ा हिस्सा जलमग्न है। नरसिंह का कहना है कि यदि पानी का दबाव इसी तरह बढ़ता रहा तो बांध कभी भी क्षतिग्रस्त हो सकता है।
शनिवार की रात राजस्व विभाग की टीम बांध का निरीक्षण करने पहुंचे। इस दौरान राजस्व टीम की गाड़ी बांध पर ही फंस गई। आसपास के ग्रामीणों की मदद से ट्रैक्टर के सहारे गाड़ी को बाहर निकाला गया। तहसीलदार ने इसकी सूचना सिंचाई विभाग को भी दी। इसके बावजूद रविवार देर शाम तक बांध पर किसी बड़े स्तर का प्रभावी मरम्मत कार्य दिखाई नहीं दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि बांध की स्थिति को लेकर पहले से ही आशंका जताई जा रही थी। अब लगातार बारिश और बढ़ते पानी ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है। यदि समय रहते बांध की मरम्मत और सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं किए गए तो तटवर्ती गांवों पर बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
तहसीलदार अमित कुमार सिंह ने बताया कि शनिवार रात बांध का निरीक्षण किया गया था। राजस्व टीम की गाड़ी बांध पर फंस गई थी, जिसे ग्रामीणों की मदद से ट्रैक्टर के सहारे बाहर निकलवाया गया। इसकी सूचना सिंचाई विभाग को दे दी गई है।