सिसवा क्षेत्र के बिजापार में अधूरा पड़ा शौचालय
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ओडीएफ होने पर भी नहीं मिटा खुले में शौच का दाग
महराजगंज। जिले को खुले में शौचमुक्त घोषित कर दिया गया है। लेकिन, तस्वीर अभी पुरानी ही है। आज भी लोग खुले में शौच जा रहे है। तमाम परिवार ऐसे हें जिनके घर में शौचालय बना नहीं है। इससे महिलाओं को अधिक परेशानी है। निचलौल तहसील क्षेत्र के बीजापार, गेरमा, कुईयां गांव में तमाम शौचालय अधूरे पडे हैं। लेकिन, इस दिशा में कोई कारगर कदम नहीं उठाए जाने से आज भी लोग शौच के लिए खुले में जा रहे हैं।
स्वच्छ भारत अभियान के तहत जिले में 923 ग्राम पंचायतें में तीन लाख परिवारों को शौचालय निर्माण के लिए बजट आवंटित कर 30 सितंबर 2018 को खुले में शौचमुक्त घोषित कर दिया गया। इसके बाद शौचालय से वंचित लोगों की जांच शुरू की गई। छूटे पात्र लाभार्थियों की जांच कर उन्हें शौचालय बनवाने के लिए व्यवस्था की गई। लेकिन हालात नहीं बदले। निचलौल तहसील क्षेत्र के बीजापार गांव के बाहर खुले में शौचमुक्त घोषित होने की वास्तविक तस्वीर दिख जाएगी। सुबह और शाम के समय तमाम लोग बाहर शौच के लिए जाते हुए दिख जाएंगे। इस गांव में करीब 12 से अधिक लोग ऐसे हैं, जिनका शौचालय अधूरा है। कुछ शौचालय ऐसे हैं, जहां भूसा रखा गया है।
गेरमा गांव की सुभावती देवी ने बताया कि ग्राम प्रधान से लेकर ब्लॉक तक के अधिकारियों से शिकायत की। लेकिन, शौचालय नहीं बन सका। शिकायत करने का कोई मतलब नहीं है। कुईयां गांव की खैतुन निशा ने बताया कि शौचालय नहीं बना है। गांव में तमाम ऐसे लोगों को शौचालय बनवाने के लिए रकम मिली जिनके पास पहले से शौचालय बना था। बीजापार गांव की संगीता देवी ने बताया कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण गांव को खुले शौचमुक्त करने की मंशा पर पानी फिर गया। शौचालय अभी तक नहीं तक बन सका। रूदलापुर महेंद्र कुमार ने बताया शौचालय बनवाने के लिए कई बार मांग की। लेकिन, किसी ने ध्यान नहीं दिया। सिर्फ कागज में जिले को ओडीएफ घोषित कर दिया गया है। नोडल अधिकारी स्वच्छता मनोज त्यागी ने बताया कि सर्वे करा कर छूटे हुए लोगों का शौचालय बनवाया जा रहा है। जिले स्वच्छता अभियान को गति देने के लिए प्रयास जारी है। शौचालय का प्रयोग करने के लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा है।